Olympic 2022: चीन ने ओलंपिक खिलाड़ियों के बोलने पर लगाई पाबंदी, इस बार प्रोटेस्ट पार्क भी नहीं

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खिलाड़ियों को चेतावनी

खिलाड़ियों को चेतावनी

साल 2008 में भी चीन ने बीजिंग में ही ओलंपिक खेलों का आयोजन किया था, लेकिन उस बार खिलाड़ियों के लिए कोई नियम नहीं बनाया गया था, लेकिन इस साल ओलंपिक खेल से पहले चीन ने खिलाड़ियों के फ्री स्पीच पर प्रतिबंध लगा दिया है और खिलाड़ियों को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि, कोई भी खिलाड़ी ऐसा कुछ नहीं बोलें जिनसे चीन के कानूनों का उल्लंघन होता है। चीनी अधिकारियों ने एथलीटों को देश के कानून के खिलाफ नहीं बोलने की चेतावनी दी है और देश के अंदर उन स्थानीय कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार कर लिया गया है, जिनको लेकर कम्युनिस्ट शासन का मानना है कि, वो शीतकालीन ओलंपिक के दौरान विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं जो चीन की प्रतिष्ठा को धूमिल कर सकते हैं।

2008 में प्रदर्शन के लिए बने थे नियम

2008 में प्रदर्शन के लिए बने थे नियम

साल 2008 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक गेम्स के दौरान चीन की सरकार ने विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों के लिए राजधानी में तीन पार्कों को खोला था। इन तीन पार्कों में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने विरोध प्रदर्शन करने के लिए जारी किया था और पार्क के अंदर जाकर कोई भी आदमी विरोध प्रदर्शन कर सकता था। लेकिन, आश्चर्यजनक बात ये थी, कि इन पार्कों में विरोध प्रदर्शन के लिए कोई नहीं पहुंचा था। और बाद में खुलासा हुआ था, कि चीन की सरकार ने किसी को शख्स को पार्क में जाकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए परमिट ही नहीं दी। लेकिन, इस साल चीन ने खिलाड़ियों के बोलने पर भी पाबंदी लगा दी है। निक्केई एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, पिछली बार जिन प्रदर्शनकारियों ने खेलों के दौरान जोखिम उठाते हुए विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश की थी, उन्हें उठा लिया गया था।

'जरूरत से ज्यादा मत बोलना'

‘जरूरत से ज्यादा मत बोलना’

चीन में ओलंपिक खेलों के आयोजकों ने खिलाड़ियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि, अगर कोई भी खिलाड़ी किसी और मुद्दे पर बोलने की कोशिश करते हैं, तो उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी। पिछले महीने बीजिंग आयोजन समिति के यांग शू ने कहा था कि, कोई भी व्यवहार या भाषण जो ओलंपिक भावना के खिलाफ है, खासकर चीनी कानूनों और नियमों के खिलाफ है, उसके खिलाफ जाने वाले खिलाड़ियों को सजा मिलेगी। वहीं, चीन की सरकार की खिलाड़ियों के लिए बनाए गये इस नियम की सख्त आलोचना ह्यूमन राइट्स वॉच की तरफ से की गई है और खिलाड़ियों के बोलने पर लगाई गई पाबंदी को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है।

ह्यूमन राइट्स वॉच ने की आलोचना

ह्यूमन राइट्स वॉच ने की आलोचना

ह्यूमन राइट्स वॉच ने चीन की सरकार के इन आदेशों की सख्त आलोचना की है और बयान जारी करते हुए कहा कि, ‘ओलंपिक एथलीटों के लिए बीजिंग समिति की धमकी मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन करती है और यह अधिकार इंटरनेशन ओलंपिक कमिटी के नियमों के तहत खिलाड़ियों को मिला है। लिहाजा चीन खिलाड़ियों के बोलने पर किसी भी तरह की पाबंदी नहीं लगा सकता है।’

This News is Updated by Khabre Fatafat
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