Rajasthan: जानिए क्या है पोटाश घोटाला, जिसमें सीएम गहलोत के भाई फंसे, 13 साल पुराने केस में अब सीबीआई का छापा

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत के घर पर शुक्रवार को सीबीआई ने छापा मारा है। यह मामला पोटाश के घोटाले से जुड़ा है। इस मामले में 2020 में ईडी ने भी अग्रसेन गहलोत के घर छापा मारा था। यहां तक की कस्टम विभाग ने अग्रसेन गहलोत की कंपनी पर करीब 5.46 करोड़ रुपए की पेनाल्टी भी लगाई थी। जानिए क्या है पोटाश घोटाला मामला, जिसमें ईडी के बाद अब सीबीआई भी कूद पड़ी है।

एमओपी के निर्यात पर बैन फिर भी भेजा विदेश 
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत ‘अनुपम कृषि’ नाम के प्रतिष्ठान से खाद से जुड़ा काम करते हैं। डायरेक्ट्रोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस ने 2012-13 में पोटाश घोटाले का खुलासा किया था। ईडी के अनुसार अग्रसेन गहलोत की कंपनी अनुपम कृषि, म्यूरियेट ऑफ पोटाश (एमओपी) फर्टिलाइजर के एक्सपोर्ट पर बैन होने के बावजूद उसके निर्यात में शामिल थी। एमओपी को इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) निर्यात कर किसानों को सब्सिडी पर बेचती है। अग्रसेन गहलोत आईपीएल के ऑथराइज्ड डीलर थे।

किसानों का खाद दूसरी कंपनी को बेचा
साल 2007 से 2009 के बीच उनकी कंपनी ने सब्सिडाइज रेट पर एमओपी खरीदा। उसे किसानों को बेचने के बजाय मुनाफा में दूसरी कंपनी को बेच दिया गया। उन कंपनियों ने एमओपी को इंडस्ट्रियल सॉल्ट के नाम पर मलेशिया और सिंगापुर पहुंचा दिया। उस समय अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री थे और केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी।

ऐसे खुली पोल
अहमदाबाद स्थित डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू के रीजनल ऑफिस को सबसे पहले इस घोटाले की भनक लगी थी। डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू को पता चला कि एक फर्म एमओपी एक्सपोर्ट कर रही है। फैल्सपार और इंडस्ट्रियल सॉल्ट के नाम पर एमओपी को विदेश में एक्सपोर्ट किया गया। बता दें कि एमओपी का इस्तेमाल नॉन यूरिया फर्टिलाइजर बनाने में किया जाता है।

एक आरोपी से पूछताछ में घोटाला आया सामने
जांच में सामने आया कि किसानों के नाम पर सब्सिडी में एमओपी खरीदकर करोड़ों रुपये का घोटाला किया जा रहा है। इस मामले में सबसे पहले दिनेश चन्द्र अग्रवाल का नाम सामने आया था। जिसने पूछताछ में कई राज खोले और जांच में घोटाले की परत दर परत खुलती चली गई। 

दस्तावेज में दिखाया कि किसानों को बेची एमओपी
कमिश्नर ऑफ कस्टम ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि इंडियन पोटाश लिमिटेड ने अग्रसेन गहलोत की फर्म को अपना डिस्ट्रिब्यूटर बनाया था। उसके जरिए किसानों को सस्ती दर पर एमओपी दी जानी थी। आरोप है कि अग्रसेन गहलोत ने दस्तावेज में दिखाया कि एमओपी किसानों को बेची गई लेकिन उसकी बिक्री अहमदाबाद के कुछ फर्म को की गई थी। जिन्होंने उसे विदेश में निर्यात कर दिया।

कस्टम ने यह भी बताया कि अग्रसेन की फर्म को सारा पेमेंट नकद किया गया। इसमें बिचौलिए की भूमिका निभाने वाला व्यक्ति अग्रसेन गहलोत का करीबी ही था। हालांकि, मुख्यमंत्री के भाई ने सफाई दी थी कि उन्हें नहीं पता था कि बिचौलिए ने इसे किसानों को बेचा या निर्यातकों को बेचा था। उन्हें इस मामले में सीएम गहलोत के भाई होने के कारण फंसाया जा रहा है। 

हाईकोर्ट ने लगाई थी गिरफ्तारी पर रोक
साल 2009 में कस्टम विभाग ने उनकी फर्म पर 5.45 करोड़ का जुर्माना लगाया था। इसके खिलाफ अग्रसेन गहलोत कोर्ट चले गए थे। इस मामले के नौ साल बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके घर पर छापा मारा था। इसकी जांच अभी तक लंबित चल रही है। इस मामले में अग्रसेन की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई थी। अब एक बार फिर सीबीआई ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। 

विस्तार

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत के घर पर शुक्रवार को सीबीआई ने छापा मारा है। यह मामला पोटाश के घोटाले से जुड़ा है। इस मामले में 2020 में ईडी ने भी अग्रसेन गहलोत के घर छापा मारा था। यहां तक की कस्टम विभाग ने अग्रसेन गहलोत की कंपनी पर करीब 5.46 करोड़ रुपए की पेनाल्टी भी लगाई थी। जानिए क्या है पोटाश घोटाला मामला, जिसमें ईडी के बाद अब सीबीआई भी कूद पड़ी है।

This News is Updated by Khabre Fatafat
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