India
oi-Prashanth Rai
नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने महिला कैंडिडेट के लिए योग्यता के नियम में बड़ा बदलाव किया था, जिसपर विवाद गहराने के बाद बैंक ने अस्थायी रूप से स्थगन का फैसला किया है। बैंक के नए नियम के मुताबिक तीन महीने से अधिक समय की गर्भवती महिलाओं को अस्थाई रूप से अनफिट मानने का प्रावधान किया गया था और डिलीवरी के बाद चार महीने के भीतर बैंक ज्वाइन कर सकती थीं। बता दें कि इस नए नियम को लेकर दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने विरोध किया और इसे वापस लेने के लिए नोटिस भी भेजा था। वहीं ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एंप्लाईज एसोसिएशन ने भी सवाल उठाया था।

नए नियम को रद्द करने के बाद बैंक ने बयान जारी करते हुए कहा कि जनता की भावनाओं को देखते हुए, एसबीआई ने गर्भवती महिला उम्मीदवारों की भर्ती के संबंध में संशोधित निर्देशों को स्थगित रखने और मामले में मौजूदा निर्देशों के साथ जारी रखने का फैसला किया है।
बैंक ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि संशोधित दिशानिर्देशों का उद्देश्य स्वास्थ्य मानकों पर स्पष्टता प्रदान करना था जहां निर्देश स्पष्ट नहीं थे या बहुत पुराने थे। मीडिया के कुछ वर्गों में, इस संबंध में मानदंडों में संशोधन को महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण के रूप में बताया गया है।
एसबीआई हमेशा अपनी महिला कर्मचारियों की देखभाल और सशक्तिकरण के लिए सक्रिय रहा है, जो अब हमारे कार्यबल का लगभग 25 फीसदी हैं। बयान में आगे लिखा गया है कि COVID अवधि के दौरान, सरकार के निर्देशों के अनुसार, गर्भवती महिला कर्मचारियों को कार्यालय में आने से छूट दी गई और घर से काम करने की अनुमति दी गई थी।
English summary
sbi temporarily suspend contoversial cicular for pregnant woman woker in bank
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