ईरान ने भारत के लिए खोला अफगानिस्तान का दरवाजा, जानिए कैसे हाथ मलता रह गया पाकिस्तान?

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भारत को बहुत बड़ा ऑफर

भारत को बहुत बड़ा ऑफर

ईरानी विदेश मंत्रालय ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से हुई टेलीफोन पर बातचीत के बादभारत को ये बहुत बड़ा ऑफर दिया है और बकायदा ट्वीट करते हुए कहा ईरानी विदेश मंत्री हुसैनअमीर-अब्दुल्लाहियन ने यह पेशकश की है। भारतीय विदेश मंत्री के साथ बातचीत में ईरानी विदेशमंत्री अमीर-अब्दुल्लाहियन ने काबुल में एक समावेशी सरकार के गठन का भी आह्वान किया है।लेकिन, ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि, अफगानिस्तान की मदद के लिए भारत ईरान के चाबहारबंदरगाह का इस्तेमाल कर सकता है, जो भारत के लिए एक बहुत बड़ा ऑफर है और अब तक भारतको अफगानिस्तान की मदद से रोकने वाले पाकिस्तान की परमानेंट छुट्टी हो गई है।

चाबहार बंदरगाह का भारत करे इस्तेमाल

चाबहार बंदरगाह का भारत करे इस्तेमाल

ईरान के विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात करने के बाद अफगानिस्तान में एकसमावेशी सरकार बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने अफगानिस्तान को भारत कीमानवीय सहायता का भी उल्लेख किया है और भारत की सहायता को अफगानिस्तान तक पहुंचाने केलिए चाहबार बंदरगाह के इस्तेमाल करने का ऑफर दिया है। उन्होंने कहा कि, अफगानिस्तान में गेहूं,दवा और कोविड -19 वैक्सीन के रूप में स्थानांतरित करने के लिए इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरानभारत की मदद करेगा। आपको बता दें कि,ईरान और अफगानिस्तान करीब 920 किलोमीटर लंबीसीमा साझा करते हैं और तालिबान के साथ ईरान के रिश्ते कभी अच्छे नहीं रहे है।

अफगानिस्तान की मदद करता भारत

अफगानिस्तान की मदद करता भारत

भारत पहले ही जीवन रक्षक दवाओं और कोविड-19 के टीकों की तीन अलग-अलग खेपअफगानिस्तान भेज चुका है। जबकि पहली खेप एक विशेष चार्टर उड़ान पर भेजी गई थी, जो काबुलसे 104 लोगों को नई दिल्ली लेकर आई थी, बाद में ईरान की ‘महान एयर’ की उड़ान के माध्यम सेकाबुल को सहायता भेजी गई थी। हालांकि, पाकिस्तान के अड़ंगे की वजह से अभी तक भारत 50हजार टन गेहूं की आपूर्ति अफगानिस्तान को नहीं कर पाया है, क्योंकि, पाकिस्तान ने भारतीय ट्रकों कोपाकिस्तान होकर गुजरने की इजाजत नहीं दी है और अंतर्राष्ट्रीय दवाब में जब इमरान खान ने हामीभरी भी थी, तो इतने नियम लगा दिए गये थे, कि भारत के लिए अफगानिस्तान तक मदद पहुंचानानामुमकिन हो गया था। असल में पाकिस्तान का मकसद सिर्फ एक था, भारत को अफगानिस्तान सेदूर रखना, लेकिन ईरान ने पाकिस्तान के हर किए धरे पर पानी फेर दी है।

ईरान की तरफ से ही दिया गया ऑफर

ईरान की तरफ से ही दिया गया ऑफर

ईरानी और भारतीय विदेश मंत्रियों की टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद जब दोनों देशों के विदेशमंत्रियों ने ट्वीट की, तो भारत की तरफ से चाबहार पोर्ट का जिक्र नहीं किया गया और अफगानिस्तानका जिक्र भी अलग मायनो में किया गया था, लेकिन जब ईरानी विदेश मंत्री ने ट्वीट किया, तो उन्होंनेबकायदा इस बात का उल्लेख करते हुए कहा कि, ”भारत ईरान के चाबहार बंदगहार का उपयोग करअफगानिस्तान तक मानवीय मदद पहुंचा सकता है”। लिहाजा, ईरान ने एक ही चाल में अंतर्राष्ट्रीयसमुदय के बीच ना सिर्फ पाकिस्तान की पोल खोलकर रख दी है, बल्कि भारत को चाबहार बंदरगाह केजरिए अफगानिस्तान को सहायता भेजने का विकल्प भी दे दिया है।

कितना महत्वपूर्ण है चाबहार पोर्ट?

कितना महत्वपूर्ण है चाबहार पोर्ट?

ईरान के दक्षिण पूर्वी भाग में सिस्ताम-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार पोर्ट रणनीतिक तौर पर भारतके लिए बेहद अहम है और इसके जरिए भारत को ईरान, अफगानिस्तान सहित पूरे मध्य एशिया, रूसऔर यूरोप से भी व्यापार करने के लिए रास्ता मिल जाता है। अरब सागर में स्थित इस बंदरगाह केजरिए भारत-ईरान-अफगानिस्तान के बीच नये रणनीतिक ट्रांजिट मार्ग की शुरूआत हो जाती है औरइस रास्ते का निर्माण होने के बाद अब तीनों देशों का व्यापार काफी मजबूत हो सकता है। इस पोर्ट केनिर्माण के साथ ही भारत के लिए अफगानिस्तान तक पहुंचना भी बेहद आसान हो जाता है। अभी तकअफगानिस्तान तक सामान भेजने या फिर मंगवाने के लिए भारत को पाकिस्तान के रास्ते का इस्तेमालकरना पड़ता था लेकिन अब पाकिस्तान हमेशा के लिए पीछे छूट गया है।

ईरान के साथ संपर्क में था भारत

ईरान के साथ संपर्क में था भारत

15 अगस्त को तालिबान के कब्जे में आने के बाद से अफगानिस्तान के घटनाक्रम को लेकर भारतईरान के संपर्क में लगातार रहा है।ईरानी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने दो महीने पहले अफगान संकटपर भारत द्वारा आयोजित एक क्षेत्रीय सम्मेलन में भी भाग लिया था। कॉन्क्लेव में रूस, कजाकिस्तान,किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उजबेकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने भी भागलिया था। वहीं, ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि, ईरानी विदेश मंत्री आमिर-अब्दुल्लाहियन ने प्रमुखद्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर एस. जयशंकर के साथ विचारों का आदान-प्रदान किया।

पाकिस्तान कैसे अड़ाता था अड़ंगा?

पाकिस्तान कैसे अड़ाता था अड़ंगा?

दरअसल, पाकिस्तान किसी भी हाल में नहीं चाहता है कि, अफगानिस्तान तक भारत पहुंच पाए।क्योंकि, अफगानिस्तान की सरकार भले पाकिस्तान समर्थित है, लेकिन अफगानिस्तान की जनता भारतके साथ है। लिहाजा, जैसे ही भारत अफगानिस्तान तक मदद पहुंचाने की कोशिश करता था,पाकिस्तान अलग अलग तरह से अड़चने पैदा करने में लग जाता था। अफगानिस्तान तक मदद भेजनेके लिए भारत के लिए आसान तरीका पाकिस्तान ही है और इसी का फायदा उठाने की कोशिशपाकिस्तान करता रहा है। पाकिस्तान ने पहले कहा था कि, भारतीय गेहूं को अफगानिस्तान तक भेजनेके लिए पाकिस्तानी ट्रकों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसपर पाकिस्तानी झंडा लगा होगा, जिसे भारतने स्वीकार भी कर लिया। लेकिन, दांव उल्टा पड़ता देख पाकिस्तान ने बयान बदल लिया और कहाकि, अफगानिस्तान की ट्रकों से ही भारतीय गेहूं को अफगानिस्तान तक पहुंचाया जाएगा। जो फिलहालसंभव नहीं है। भारत ने पाकिस्तान का विरोध करते हुए कहा था कि, मानवीय मदद के लिए किसी भीतरह की शर्तें नहीं होनी चाहिए।

This News is Updated by Khabre Fatafat
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