नर्सिंग महाविद्यालय में अंगदान पर संगोष्ठी आयोजित

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जितेन्द्र पुरोहित

राजकीय नर्सिंग महाविद्यालय जोधपुर में अंगदान जन-जागरूकता के अंतर्गत अंगदान का अवलोकन, ब्रेन डेड अंगदाताओं की पहचान और देखभाल, और अंगदान में आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालने के उद्देश्य से संगोष्ठी का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के प्रधानाचार्य मुकेश तेतरवाल ने बताया कि महाविद्यालय के विद्यार्थियों, फैकल्टी व स्कूल ऑफ नर्सिंग की फैकल्टी की उपस्थिति मे अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से शुक्रवार को एमएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।अंगदान आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह जीवन बचाने की प्रक्रिया है, क्योंकि एक मृत दाता आठ से अधिक लोगों की जान बचा सकता है। जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए यकृत, गुर्दा, अग्न्याशय, हृदय, फेफड़े, आंत और हाथ जैसे अंग जरूरतमंद व्यक्ति को दान किए जा सकते हैं। यहां तक ​​कि एक जीवित व्यक्ति भी किसी की जान बचाने के लिए अपने शरीर के अंग जैसे गुर्दा, अस्थि मज्जा, यकृत और फेफड़ों के कुछ हिस्से दान कर सकता है।कई लोग गुर्दा, यकृत, हृदय, फेफड़े की विफलता के कारण अपनी अनमोल जान गंवा देते हैं और उनकी जान केवल समय पर अंग प्रत्यारोपण से ही बचाई जा सकती है।

प्रत्यारोपण के लिए अंग जीवित अंगदाता द्वारा गुर्दा, यकृत व ब्रेन डेड वाले व्यक्ति से आठ अंग जैसे दो गुर्दे, एक यकृत, हृदय, दो फेफड़े, अग्न्याशय व आँख प्राप्त किए जा सकते हैं, जिससे आठ लोगों की जान बचाई जा सकती है। इसलिए ब्रेन डेड के बाद लोगों को अंगदान के बारे में जागरूक करने की आवश्यक है।अंगदाता के परिवार के सदस्यों को अंगदान की आवश्यकता को समझाने के लिए परामर्श दिया जाना चाहिए। हमारा उद्देश्य लोगों को अंगदान के नेक कार्य द्वारा अंतिम अंग विफलता से पीड़ित व्यक्ति को नया जीवन देने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस संगोष्ठी में अंगदान से संबंधित अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई। अंगदान की प्रक्रिया सरल है और इसमें ज्यादा समय नहीं लगता। इसमें अंगदाता के रूप में पंजीकरण कराना और अपने परिवार के सदस्यों को अपनी इच्छा बताना शामिल है। अंगदान करुणा का सबसे बड़ा कार्य है।कानूनी समझ, परिवार की सहमति, जागरूकता और बुनियादी ढांचे के बारे में जानकारी से अंगदान में बढ़ोतरी की जा सकती हैं।अंगदान की आपूर्ति और मांग के अंतर को जन-जागरूकता के द्वारा दूर किया जा सकता है। संगोष्ठी में स्कूल ऑफ नर्सिंग से ब्लेसी एलियास व दीपा पी उपस्थित रहे। मुरली धर शर्मा द्वारा संगोष्ठी के आयोजन में सहयोग के लिए एमएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों व पूर्णिमा चौधरी एवं उपस्थित विद्यार्थियों और फैकल्टी का आभार जताया गया।

This News is Updated by Khabre Fatafat
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