
जोधपुर। इसे तरक्की की ओर बढ़ते क़दम कहे या उस राह पर बहकते क़दम कहे। लेकिन आज हमने इतनी तरक्की कर ली कि अब अपने आप से डर लगने लगा है।इंसान के विज्ञान की ओर बढ़ते और बहकते क़दमों की दास्तां लेकर आया नाटक पब्जी। जिसका आज प्रथम और सफ़ल मंचन महाराष्ट्र समाज के गणपति उत्सव में किया गया। नाटक के लेखक और निर्देशक प्रमोद वैष्णव थे।
कथानक के अनुसार दादाजी को रात को अजीब अजीब सी आवाज़े आती है।ऎसा लगता है कि कोई किसी पर हमला करने जा रहा है,बहुत ही ख़तरनाक हथियार लेकर,,,।उन आवाज़ों से दादाजी डर जाते है।लेकिन ये डर अपने अंदर ही रखते है,किसी बताते नहीं है। धीरे धीरे काॅलोनी के और लोग भी इन आवाज़ो से ग्रसित हो जाते है सोशल मीडिया के के जरिए बात पुलिस तक पहुंच जाती है।
सब कुछ उल्टापुल्टा होने बाद राज़ खुलता है कि काॅलोनी के बच्चे पब्जी खेलते है और ये उसी की आवाज़े है।
बेहद सशक्त इस प्रस्तुति में बहू के रुप में अद्वैता शर्मा,बाबूजी के क़िरदार में मज़ाहिर सुल्तान ज़ई, और टीटू के रुप में शैलेन्द्र व्यास नेअपनी अभिनय क्षमता से दर्शको का ख़ासा मनोरंजन करते हुए नाटक को एक अलग ही मुकाम पर खड़ा कर दिया।इसके अलावा नकुल(नकुल दवे),निन्नी(निहार खान) इंसपेक्टर(वाजिद हसन क़ाज़ी) ने भी नाटक की गति को बरकरार रखने में अपनी सार्थक भूमिका निभाई। इसके अलावा पड़ोसन(योगिता टाक),हवलदार(सत्यनारायण चितारा),अलवीरा,रेहान बेलिम, सोहेल ख़ान और अनवर अली ने अपनी उपस्थिति दर्शाई।मंच के पीछे जिन लोगों की मेहनत थी। उनमें मंच व्यवस्था ख़लील खान,,रंगदीपन(मोहम्मद इमरान),संगीत(नीलोत्पला त्रिवेदी ) प्रमुख रुप से थे। मंच संचालन प्रमोद सिंघल का रहा।
नोट :- अन्य अपडेट लगातार पाने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें| आप हमें ट्वीटर पर भी फॉलो कर सकते हैं| आप हमारा एंड्राइड ऐप भी डाउनलोड कर सकते है|नवीनतम वीडियो न्यूज देखने के लिए हमें यूटूब (Youtube) पर सब्सक्राइब करें।

















