Alwar: बारात लेकर माता जानकी को ब्याहने चले भगवान जगन्नाथ, अलवर की सड़कों पर उमड़ा जन सैलाब

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Lord Jagannath went to Alwar to marry Mata Janaki with a wedding procession

बारात लेकर चले भगवान जगन्नाथ।
– फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

अलवर में भगवान श्री जगन्नाथ जी के वैवाहिक कार्यक्रम के तहत मंगलवार को मुख्य कार्यक्रम बारात रूपी रथ यात्रा का रहा। आज शाम शहर के पुराना कटला स्थित जगन्नाथ जी के प्राचीन मंदिर से भव्य रथ यात्रा रवाना हुई, जिसमें भक्तों का सैलाब इस कदर उमड़ा कि रथ यात्रा के मार्ग में पड़ने वाले बाजारों में तिल रखने को जगह नहीं थी।

रथ यात्रा में शहर वासियों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग बाराती बनें। दूल्हा बने भगवान जगन्नाथ जी को जयघोषों और घंटे-घड़ियालों और शंखनाद के साथ मंदिर से लाकर इन्द्र विमान रथ में विराजमान किया गया। जगन्नाथ जी को जब रथ में विराजमान किया जा रहा था तो वहां मौजूद भक्तों का सैलाब जगन्नाथ जी और माता जानकी की जय-जयकार कर उठा। बिजली की रोशनी से लकदक दो मंजिला इन्द्र विमान रथ अपनी परंपराओं के अनुसार जब रूपबास के लिए रवाना हुआ तो श्रद्धालु हाथ जोड़कर खड़े हो गए। रथ में विराजमान भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा मार्ग में पड़ने वाले वैष्णव मंदिरों पर भगवान जगन्नाथ जी की आरती की गई।

रथयात्रा के साथ भजन

मंडलियां भी भजनों की प्रस्तुति देते हुए चल रही थी। रथ यात्रा के मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह छोले चनों का प्रसाद भी वितरित किया। रथ यात्रा के कारण आज पूरे शहर में मेले जैसा माहौल बना हुआ था। जगह-जगह गुब्बारों, वाद्य यंत्रों, खिलौनों की बिक्री की जा रही थी। जिन्हें बच्चे बड़े शौक से खरीद कर अपने घर ले जा रहे थे। मंदिर के महंत पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि यहां की परंपराओं के अनुसार जिला प्रशासन द्वारा इस मेले का भव्य आयोजन किया जाता है और जिला कलेक्टर के आगमन के पश्चात ही भगवान जगन्नाथ को दूल्हे के रूप में रथ में विराजित किया गया। मंदिर की गुल्लक का पूजन किया जाता है। उसके बाद यह अलवर शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ करीब आठ किलोमीटर का सफर तय करते हुए रूपबास पहुंचेगा। जहां इनका मुख्य विवाह आयोजन स्थल होता है। 

30 जून को वापस रूपबास से जगन्नाथ मंदिर पहुंचेंगे

दूल्हे के रूप में पहुंचने वाले भगवान जगन्नाथ जानकी जी को ब्याह कर 30 जून को वापस रूपबास से जगन्नाथ मंदिर पहुंचेंगे। इस रथ यात्रा में सबसे आगे ऊंट चलते हैं। जो ध्वज लेकर चलते हैं। भव्य रथ यात्रा में सामाजिक संगठनों की झांकियां, पंजाब की स्पेशल बैंड मुख्य रूप से चलेंगे। इस रथयात्रा में मुख्य रूप से इस बार वृंदावन और जयपुर के भक्त आए हैं। जो जय जगन्नाथ का उद्घोष करते हुए अपनी मंडली के साथ चलेंगे। इस  इस भव्य रथयात्रा में हाथी, घोड़ी बग्गी सहित काफी झांकियों होंगी और पूरा शहर इस भव्य रथयात्रा के स्वागत के लिए उमड़ता है।

रास्ते में जगह-जगह ठंडे पानी और शरबत की छबील लगाई गई

रथ यात्रा के साथ चल रही भजन मंडलियां विशेष आकर्षण का केन्द्र रही। करीब आठ कि.मी. लम्बे रथ यात्रा के मार्ग में लगभग सौ जगह मीठे पानी के प्याऊ लगाए गए। जिन पर पानी और शरबत पीने के लिए लोग उमड़ रहे थे। शहर में निकली इस रथ यात्रा को देखने लोग अपने घरों को ताला लगाकर निकल पड़े। स्थानीय होप सर्कस, घंटाघर, पंसारी बाजार और मन्नी का बड़ से अशोक सर्किल तक का पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं के सैलाब से अटा पडा था और हर कोई श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ जी की एक झलक देखने के लिए आतुर था। रथ यात्रा के साथ घंटे-घडिय़ाल बजते हुए चल रहे थे। वहीं, बैंड वादक धार्मिक भजनों की स्वर लहरियां बिखेरते हुए चल रहे थे।

This News is Updated by Khabre Fatafat
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