
गहलोत और पायलट साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरेंगे।
– फोटो : अमर उजाला
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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को अपने साथ मीडिया के सामने लाकर सोमवार रात कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ‘हम साथ-साथ हैं’ का मैसेज देने की कोशिश की। लेकिन, गहलोत और पायलट के बीच असली लड़ाई सीएम कुर्सी की है। दोनों नेता ये बात कांग्रेस हाईकमान से कह नहीं सके।
मुद्दों की आड़ में राजनीतिक दबाव बनाने के एक और एपिसोड का सोमवार रात पटाक्षेप तब हो गया, जब बिना किसी समझौता पत्र और शर्तों के सचिन पायलट और अशोक गहलोत कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगपाल के साथ दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के निवास के बाहर मीडिया के सामने आए। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह निर्णय लिया है कि दोनों नेता साथ रहेंगे और बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। हम फिर जीत हासिल करेंगे, लेकिन इस दौरान गहलोत और सचिन पायलट दोनों नेताओं ने एक शब्द नहीं कहा, दोनों ने कभी मुस्कुराकर तो कभी सीरियस चेहरा बनाकर अपनी चुप्पी के जरिए ही काफी कुछ बिना कहे ही कह दिया।
अब सवाल ये खड़ा होता है कि क्या राजस्थान की जनता और गहलोत-पायलट के समर्थक कांग्रेस पार्टी की छिपाने की राजनीति को नहीं समझेंगे और झांसे में आ जाएंगे। ये बात दोनों नेता भी अच्छी तरह से समझते हैं। क्योंकि कांग्रेस हाईकमान ने कोई सॉल्यूशन और फॉर्म्यूला का खुलासा नहीं किया। केवल ठंडे छींटे देकर दोनों को फिलहाल शांत किया गया और साथ रहकर चुनाव लड़ने को कहा गया है।
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