
एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी
– फोटो : Amar Ujala Digital
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एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी जोधपुर पहुंचे। ओवैसी ने सीएम के गृह क्षेत्र के बंबा मोहल्ला में जनसंपर्क किया। इस दौरान जोधपुर एयरपोर्ट पर उन्होंने मीडिया से राजस्थान में इसी वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी पार्टी की रणनीति के बारे में बात की।
ओवैसी ने बताया कि राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी। इसी को लेकर प्रमुख शहरों में अपना दौरा कर रहे हैं। उनका लक्ष्य किसी भी पार्टी के खिलाफ लड़ना नहीं होकर अपनी पार्टी के कैंडिडेट को जिताना है। उन्होंने आगामी चुनाव में गठबंधन को लेकर कहा कि यह तो समय ही बताएगा।
जनसंपर्क के लिए सीएम के गृह क्षेत्र को ही चुनने को लेकर पूछे सवाल पर कहा कि जनसंपर्क करना बुरी बात नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में भी दौरा किया था। गुजरात में भी जाकर चुनाव लड़ा। जनसंपर्क के दौरान वो हर वोटर्स, हर वर्ग से मिल रहे हैं। इस बार दलितों को साथ लेकर चुनाव लड़ेंगे।
भाजपा-कांग्रेस में फिक्सिंग चल रही
राजस्थान को लेकर कहा यहां पर कांग्रेस और बीजेपी में पांच साल हम, पांच साल आप फिक्सिंग है। इसमें दलित, आदिवासियों का नुकसान हो रहा है। हर चुनाव से पहले मुस्लिम इश्यू बनता है। चुनाव के बाद सभी भूल जाते हैं। मुस्लिम हर बार ठगे जाते हैं। इसलिए उनकी पार्टी राजस्थान में मुस्लिमों के हालात के बारे में एक्सपर्ट से एक सर्वे करवा रही है। इस रिपोर्ट को 25 से 26 मार्च के बीच पेश किया जाएगा।
बजट बता रहा है कैसा विकास हो रहा
मोदी सरकार को लेकर कहा इस बार माइनॉरिटी मिनिस्ट्री का 40 प्रतिशत बजट कम कर दिया है। उन्होंने प्री मैट्रिक स्कॉलरशिप बंद कर दी। बजट बताता है कि आप सबका साथ सबका विकास कैसे कर रहे हैं।
मुसलमानों को सेकुलरिज्म का कुली बना दिया
आजादी के 75 साल मना रहे हैं। अब तक 16 से 17 आम चुनाव हो चुके हैं। इतने वर्षों में प्रमुख बिरादरियों को ताकत मिली है। इसलिए मिली क्योंकि उन्होंने अपनी पॉलिटिकल लीडरशिप को बनाया है। अफसोस की बात है कि मुसलमानों ने वोट डालने का काम किया है। वोट लेने का काम नहीं किया है। जिस दिन वह जाट, राजपूत या अन्य बिरादरियों की तरह काम करेंगे तो उनकी समस्याएं हल होंगी। राष्ट्रीय स्तर पर उनकी भी इंपॉर्टेंस होगी। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को सेकुलरिज्म का कुली बना दिया है। जब चुनाव आते हैं तो कहते हैं सेकुलरिज्म को जिंदा रखो, जबकि दूसरे उसे डुबोते रहेंगे, दफनाते रहेंगे। हमसे कहा जाएगा जिंदा रखो।
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