Rajasthan: 100 गांव हरे-भरे किए, 50 में खोले स्कूल…इजराइल को सिखाई खेती, पद्मश्री पाने वाले लक्ष्मण की कहानी

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लक्ष्मण सिंह

लक्ष्मण सिंह
– फोटो : अमर उजाला

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जयपुर से 80 किलोमीटर दूर लापोड़िया के किसान और सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण सिंह ने तीन कामों पर फोकस करके गांवों की दशा सुधारने का काम किया। पहला-जल संरक्षण, दूसरा-पौधरोपण और तीसरा-स्कूल बनाना। लक्ष्मण सिंह ने आज से करीब 40 साल पहले अपने गांव की सूरत बदलने की कोशिश शुरू की थी। करीब 66 साल के लक्ष्मण सिंह ने 5वीं कक्षा तक की पढ़ाई अपने लापोड़िया गांव से ही की। फिर अपने ननिहाल जयपुर में आकर दसवीं तक पढ़ाई की। 

दसवीं की पढ़ाई के दौरान एक बार अपने गांव आए, तब उम्र करीब 18 साल रही थी।  गांव की हालत देखकर लक्ष्मण सिंह को बहुत अफसोस हुआ, क्योंकि गांव में पानी की भयंकर किल्लत हो गई थी। लोगों को पीने का पानी भरने के लिए कुओं में नीचे तक उतरना पड़ रहा था। पानी की कमी से खेती-बाड़ी भी बर्बाद हो रही थी। लोग मजदूरी करने शहरों की तरफ भाग रहे थे। ऐसे हालातों ने इन्हें कुछ करने के लिए प्रेरित किया। 10वीं की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर इन्हें गांव की तकदीर बदलने की ठानी।

लक्ष्मण सिंह ने शुरूआत में गांव के पुराने तालाब की मरम्मत के लिए श्रमदान किया। गांव के लोग साथ जुड़ते गए और तालाब ठीक हो गया। अच्छी बरसात हुई और तालाब पानी से लबालब हो गया। तो गांव के लोगों को उनका काम और ज्ञान दोनों पर भरोसा हो गया। इसके बाद गांव के लोगों के साथ मिलकर आसपास के बहुत से गांवों में लक्ष्मण सिंह ने कई तालाब बना दिए। 

अपने गांव के युवकों को संगठित करने के लिए ‘ग्राम विकास नवयुवक मंडल लापोड़िया’ भी बनाया। जिसके 80 सदस्य गांव में तालाब बनाने के काम में स्वयंसेवा करते थे। लक्ष्मण सिंह ने अपनी संस्था के लोगों को दूसरे गांवों में भी लोगों को तालाब बनाने के लिए प्रेरित करने भेजा।

This News is Updated by Khabre Fatafat
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