
गुर्जर समाज के प्रमुख तीर्थ स्थल मालासेरी आएंगे पीएम मोदी।
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भीलवाड़ा स्थित मालासेरी में आने का प्रस्तावित कार्यक्रम चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, अभी तक अधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है, लेकिन गुर्जर समाज, भाजपा संगठन और स्थानीय प्रशासन की ओर से पीएम मोदी के प्रस्तावित दौरे को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। हो गयी है। 28 जनवरी को भगवान देवनारायण की जयंती है। इस दिन पीएम मोदी के मालासेरी आने की चर्चा है। मालासेरी गुर्जर समाज का प्रमुख तीर्थ स्थल है। इस कारण देश भर के गुर्जर समाज में पीएम के कार्यक्रम को लेकर चर्चा हो रही है।
गुर्जर समाज के आराध्या भगवान देवनारायण
लोक देवता भगवान देवनारायण जी का जन्म भीलवाड़ा जिले की आसींद तहसील के मालासेरी गांव में बगड़ावत कुल के नागवंशीय गुर्जर परिवार में हुआ था। इनकी जन्म तिथि को लेकर अलग-अलग मत है, लेकिन तत्कालीन राजवंशों, प्रमाणों और कथाओं के अनुसार उनका जन्म विक्रम संवत 1097 की माघ शुक्ल सप्तमी को माना जाता है।
इतिहासकार महावीर पुरोहित बताते हैं कि बगड़ावतों को चौहान शासकों ने आसींद से अजमेर के मसूदा तक खारी नदी के आसपास की गोठा की जागिर दी गई थी। जहां बगड़ावत वंश एकता और वीरता के प्रतीक बन गए। इस कुल में पहले राजपुरूष हरिराव थे। जिनके पुत्र बाघराव की 12 रानियां और 24 बेटे थे। इनके पुत्र ही पहले बाघ रावत और बाद में बगड़ावत कहलाए। इनमें सवाई भोज उर्फ भोजा बड़े वीर थे जो भिनाय के शासक दुर्जनसाल से युद्ध करते हुए अपने 23 भाइयों सहित वीर गति को प्राप्त हो गए थे।
इसी काल में उनकी पत्नी सोढी खटानी ने दिव्य पुत्र देवनारायण को जन्म दिया। जिनका प्रारंभिक नाम उदयसिंह उर्फ ऊदल था। ‘मारवाड़ राज की पर्दुशमारी रिपोर्ट’ तथा बीकानेर संग्रहालय में संरक्षित ग्रंथ ‘अथ वात देवजी बगड़ावत री’ के अनुसार मां ने दुर्जनसाल के खतरे को देखते हुए ऊदल को अपने पीहर देवास-मालवा में पाला। यहीं अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा लेने के साथ उन्होंने उज्जैन के क्षिप्रा नदी के किनारे सिद्धवट में साधना कर तंत्र-मंत्र और आयुर्वेद का ज्ञान हासिल किया।
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