अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन: सदन में आने से पहले होमवर्क करें माननीय, संविधान साहित्य भी पढ़ें

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राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र।

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र।
– फोटो : ANI

विस्तार

विधानसभा या संसद में उठाए मुद्दों में तर्क व तथ्य लाने के लिए विधायक और सांसदों को होमवर्क करके आना चाहिए। यह फैसला 83वीं अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में हुआ।

इस दौरान 27 विधानसभा अध्यक्षों ने मिलकर तय किया है कि वे अपने-अपने सदन में जन प्रतिनिधियों के व्यवहार बदलाव पर कार्य करेंगे। राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने पीठासीन अधिकारियों से कहा है कि वे जनप्रतिनिधियों को संविधान साहित्य और शोध से जुड़ी सामग्रियां तत्काल उपलब्ध कराएं, ताकि विधायिका को लेकर इनकी समझ और विकसित हो सके। जयपुर स्थित राजस्थान विधानसभा में जारी दो दिवसीय सम्मेलन का बृहस्पतिवार को समापन हुआ। इससे पहले देश के 49 विधानसभा और विधान परिषद अध्यक्षों की मौजूदगी में दो दिन तक अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा हुई और इस दौरान एक दर्जन से ज्यादा निर्णय लिए गए। साथ ही, सभी ने मिलकर आठ संकल्प के जरिये विधायिका की साख व गरिमा को मजबूत रखने का वादा किया।

  • संविधान, विधायिका और विधानमंडलों के नियम-कानूनों की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए लोकतंत्र शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • देश के सभी विधानमंडल मिलकर एक राष्ट्रीय अभियान चलाएंगे। इसमें प्रत्येक विधानसभा युवा संसद, प्रदर्शनी, विश्वविद्यालयों के छात्रों में लोकतंत्र की जानकारियां देने के लिए विविध कार्यक्रमों का आयोजन होगा।

हैरानी… 10-15 साल विधायक रहने के बाद भी नियम नहीं पता

जनप्रतिनिधियों में विधायिका के प्रति कम जानकारी होने का मुद्दा भी उठा। उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा, मुझे यह कहते हुए बड़ी पीड़ा होती है कि लोग 10-15 साल तक विधायक रह लेते हैं। इसके बावजूद उनको कट मोशन तक का पता नहीं होता। इस पर दिल्ली, बिहार, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक सहित लगभग सभी राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों ने सहमति जताई और कहा कि जनप्रतिनिधियों को बुनियादी जानकारियां होना बहुत आवश्यक है।

  • दुनिया में भारत लोकतंत्र की जननी है और सभी देशों के आगे आदर्श बनने के लिए समानता, समावेशिता, बंधुत्व, शांति और स्थायी जीवन शैली का पूर्ण समर्थन देंगे।
  • विधायी निकायों की शक्तियों के माध्यम से कानून बनाने और भारत के संविधान में निहित संवैधानिक सीमाओं का सम्मान करने में अपने पूर्ण विश्वास की पुष्टि करता है।
  • सदन में शालीनता, गंभीरता और बेहतर बहस को लेकर सदस्यों की आचार संहिता पर जोर दिया जाएगा।
  • सदन की कार्यवाही में किसी भी तरह का विघ्न रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगें।
  • समिति सिस्टम को और मजबूत करने पर बल दिया जाएगा। रुचि के अनुसार सदस्यों को समिति में शामिल करने की दिशा में कार्य होगा।
  • वित्तीय मुद्दों पर अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का चेयरमैन राज्य सरकार से वार्तालाप करेगा।
  • देश के सभी विधानमंडल, लोकसभा और राज्यसभा मिलकर राष्ट्रीय डिजिटल ग्रिड सिस्टम पर कार्य करेंगे और एक ही प्लेटफार्म पर आकर लोगों को लोकतंत्र के बारे में सभी जानकारियां उपलब्ध कराएंगें।
  • बेहतर कार्य करने पर विधानमंडल को सम्मानित किया जाएगा, ताकि औरों को उनसे प्रेरणा मिल सके।

This News is Updated by Khabre Fatafat
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