Rajasthan: आखिर कब तक कार्यकर्ताओं की मुराद पर फिरेगा पानी, नियुक्तियां होंगी या सिर्फ बयानबाजी ही

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(सांकेतिक तस्वीर)

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– फोटो : सोशल मीडिया

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राजस्थान कांग्रेस पार्टी में सचिन पायलट के पीसीसी अध्यक्ष के पद से हटाने के बाद से खाली हुए लगभग एक लाख से भी ज्यादा पदों को भरने के लिए दो साल छह महीने बाद भी कोई हलचल नहीं होने से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर होता जा रहा है। प्रदेश में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा निकलने से कार्यकर्ताओं में एक उम्मीद जगी थी कि अब कुछ होगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। हालांकि, राहुल गांधी ने एक नहीं कई बार कार्यकर्ताओं को ही पार्टी की रीड की हड्डी बताया था। राहुल ने कहा था, कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ताओं की ही वजह से चलती है, लेकिन यात्रा प्रदेश से चली गई और नतीजा सिफर रहा।

प्रदेश को नए प्रभारी के रूप में सुखजींदर सिंह रंधावा मिले, जिन्होंने मैराथन बैठक कर प्रदेश के सभी नेताओं, बोर्ड, निगम के अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं से भी फीड बैंक लिया। जल्दी ही सब कुछ ठीक होने के संकेत भी दिए थे। रंधावा ने दो दिन में प्रदेश कांग्रेस की स्थिति को बेहतर करने की भी बात कही थी। रंधावा का भी मानना था, जल्द ही जिला स्तर की इकाई पर नियुक्ति करना ही उनकी प्राथमिकता होगी। लेकिन नए साल के भी दो दिन बीत चुकने के बाद किसी भी प्रकार की कोई हलचल नहीं होने से कार्यकर्ताओं में निराशा की लहर देखी जा रही है। प्रदेश पदाधिकारी जल्दी ही घोषणा की बात कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहती है।

राजनीतिक नियुक्तियां लंबे अर्से से बाकी…
राजस्थान में कुल एक लाख से भी ज्यादा नियुक्तियां होनी हैं, जबकि चुनाव में मात्र 300 दिन ही बाकी बचे हुए हैं। उदयपुर अधिवेशन में भी नियुक्तियां का मुद्दा उठा था और जल्द ही इसको पूरा करने की बात भी हुई थी। लेकिन उदयपुर अधिवेशन को भी हुए साल होने को है, लेकिन नियुक्तियां नहीं हुई हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व PCC अध्यक्ष सचिन पायलट की आपसी खींचतान के चलते लंबे समय से रिक्त पड़े यह पद कांग्रेस की चिंता को बढ़ाने वाले हैं। बिना संगठन के चुनाव में किस प्रकार कांग्रेस बीजेपी का सामना करेगी यह एक बड़ा सवाल है?

विस्तार

राजस्थान कांग्रेस पार्टी में सचिन पायलट के पीसीसी अध्यक्ष के पद से हटाने के बाद से खाली हुए लगभग एक लाख से भी ज्यादा पदों को भरने के लिए दो साल छह महीने बाद भी कोई हलचल नहीं होने से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर होता जा रहा है। प्रदेश में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा निकलने से कार्यकर्ताओं में एक उम्मीद जगी थी कि अब कुछ होगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। हालांकि, राहुल गांधी ने एक नहीं कई बार कार्यकर्ताओं को ही पार्टी की रीड की हड्डी बताया था। राहुल ने कहा था, कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ताओं की ही वजह से चलती है, लेकिन यात्रा प्रदेश से चली गई और नतीजा सिफर रहा।

प्रदेश को नए प्रभारी के रूप में सुखजींदर सिंह रंधावा मिले, जिन्होंने मैराथन बैठक कर प्रदेश के सभी नेताओं, बोर्ड, निगम के अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं से भी फीड बैंक लिया। जल्दी ही सब कुछ ठीक होने के संकेत भी दिए थे। रंधावा ने दो दिन में प्रदेश कांग्रेस की स्थिति को बेहतर करने की भी बात कही थी। रंधावा का भी मानना था, जल्द ही जिला स्तर की इकाई पर नियुक्ति करना ही उनकी प्राथमिकता होगी। लेकिन नए साल के भी दो दिन बीत चुकने के बाद किसी भी प्रकार की कोई हलचल नहीं होने से कार्यकर्ताओं में निराशा की लहर देखी जा रही है। प्रदेश पदाधिकारी जल्दी ही घोषणा की बात कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहती है।

राजनीतिक नियुक्तियां लंबे अर्से से बाकी…

राजस्थान में कुल एक लाख से भी ज्यादा नियुक्तियां होनी हैं, जबकि चुनाव में मात्र 300 दिन ही बाकी बचे हुए हैं। उदयपुर अधिवेशन में भी नियुक्तियां का मुद्दा उठा था और जल्द ही इसको पूरा करने की बात भी हुई थी। लेकिन उदयपुर अधिवेशन को भी हुए साल होने को है, लेकिन नियुक्तियां नहीं हुई हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व PCC अध्यक्ष सचिन पायलट की आपसी खींचतान के चलते लंबे समय से रिक्त पड़े यह पद कांग्रेस की चिंता को बढ़ाने वाले हैं। बिना संगठन के चुनाव में किस प्रकार कांग्रेस बीजेपी का सामना करेगी यह एक बड़ा सवाल है?

This News is Updated by Khabre Fatafat
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