Rajasthan: 40 साल की नौकरी में 1000 पोस्टमॉर्टम, रिटायरमेंट पर कहा- सपने में दिखती हैं लाशें, अब भक्ति करूंगा

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सफाई कर्मचारी भागीरथ सेवानिवृत्त हुए।

सफाई कर्मचारी भागीरथ सेवानिवृत्त हुए।
– फोटो : सोशल मीडिया

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40 साल की नौकरी में एक हजार पोस्टमार्टम कर चुका हूं। मुझे दिन-रात लाशें दिखाई देती हैं। अब मन की शांति के लिए भगवान की भक्ति करना चाहता हूं। यह बातें भरतपुर के जिला अस्पताल से सेवानिवृत्त हुए सफाई कर्मचारी भागीरथ ने कहीं। वे 31 दिसंबर को 40 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त पर हुए विदाई समारोह में बोल रहे थे। 

भागीरथ 1982 में सफाई कर्मचारी के तौर पर आरबीएम अस्पताल से जुड़े थे। अपने विदाई समारोह में उन्होंने कहा कि 40 साल की सेवा में करीब 1000 से अधिक शवों का पीएम करने में सहयोगी रहा हूं। दिन-रात मुझे लाश ही दिखाई देती है। अब मैं सेवानिवृत हो गया हूं, इसलिए मन की शांति के लिए भगवान की पूजा-अर्चना करना चाहता हूं।  

भागीरथ ने कहा कि कोरोना काल में मृत लोगों के शव का पीएम करना और उनके शव को अच्छे पैक कर गाड़ी से भेजने का काम कर रहा था। परिवार के लोग भी अपनों के पास नहीं आना चाह रहे थे। उस समय एहसास हुआ कि यहां कोई किसी का नहीं है। भागीरथ ने गुर्जर आंदोलन और कामा टंकी हादसे में मारे गए लोगों के शव का पीएम कराने में सहयोग किया था।  

शनिवार को हुए विदाई समारोह में भागीरथ को उनके  परिजनों और सहकर्मियों ने आरबीएम अस्पताल में माला और साफा पहनाकर सम्मान किया।  

विस्तार

40 साल की नौकरी में एक हजार पोस्टमार्टम कर चुका हूं। मुझे दिन-रात लाशें दिखाई देती हैं। अब मन की शांति के लिए भगवान की भक्ति करना चाहता हूं। यह बातें भरतपुर के जिला अस्पताल से सेवानिवृत्त हुए सफाई कर्मचारी भागीरथ ने कहीं। वे 31 दिसंबर को 40 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त पर हुए विदाई समारोह में बोल रहे थे। 

भागीरथ 1982 में सफाई कर्मचारी के तौर पर आरबीएम अस्पताल से जुड़े थे। अपने विदाई समारोह में उन्होंने कहा कि 40 साल की सेवा में करीब 1000 से अधिक शवों का पीएम करने में सहयोगी रहा हूं। दिन-रात मुझे लाश ही दिखाई देती है। अब मैं सेवानिवृत हो गया हूं, इसलिए मन की शांति के लिए भगवान की पूजा-अर्चना करना चाहता हूं।  

भागीरथ ने कहा कि कोरोना काल में मृत लोगों के शव का पीएम करना और उनके शव को अच्छे पैक कर गाड़ी से भेजने का काम कर रहा था। परिवार के लोग भी अपनों के पास नहीं आना चाह रहे थे। उस समय एहसास हुआ कि यहां कोई किसी का नहीं है। भागीरथ ने गुर्जर आंदोलन और कामा टंकी हादसे में मारे गए लोगों के शव का पीएम कराने में सहयोग किया था।  

शनिवार को हुए विदाई समारोह में भागीरथ को उनके  परिजनों और सहकर्मियों ने आरबीएम अस्पताल में माला और साफा पहनाकर सम्मान किया।  

This News is Updated by Khabre Fatafat
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