Memories 2022: CM बनते-बनते रहे पायलट, ‘गद्दार’ से ‘दोस्ती’ और भाजपा नेताओं में टकराव, पांच यादगार सियासी कांड

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हम बहुत जल्द साल 2022 को अलविदा कहने वाले हैं। 31 दिसंबर की रात पूरी दुनिया जश्न में डूबी होगी और नए साल 2023 का स्वागत कर रही होगी। अच्छी और बुरी यादों के साथ हम नए साल में प्रवेश कर जाएंगे। बीतते समय के साथ हमारी यादें कुछ धुंधुली पड़ जाती हैं, ऐसे में ‘अमर उजाला’ यादें 2022 सरीज लेकर आ रहा है। इस सीरीज में हम अच्छी-बुरी यादें ताजा करेंगे। कई घटनाएं ऐसी होंगी जो हमें दहला देंगी कुछ हमें हंसा देंगी तो कुछ हैरान कर देंगी। अमर उजाला की दूसरी सीरीज में हम राजस्थान की पांच सियासी घटनाओं की यादें ताजा करेंगे, जिन्होंने प्रदेश की राजनीति को देशभर में चर्चा का केंद्र बना दिया था। आइए जानतें हैं इन घटनाओं के बारे में…।

जूता कांड के बाद पायलट और चांदना का टकराव

13 सितंबर को राजस्थान के युवा मामले और खेल राज्य मंत्री अशोक चांदना पुष्कर में गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की अस्थि विसर्जन कार्यक्रम में पहुंचे थे। चांदना भाषण देने पहुंचे तो उन पर जूते फेंके गए और सचिन पायलट जिंदाबाद के नारे लगाए गए। इसका घटना के बाद चांदना ने सचिन पायलट पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि अगर, सचिन पायलट मुझ पर जूता फेंकवाकर सीएम बनना चाहते हैं तो बन जाएं, मेरा लड़ने का मन नहीं है। जिस दिन मैं लड़ने पर आया तो फिर एक ही बचेगा और मैं ये चाहता नहीं हूं। 

 

दो बड़े भाजपा नेताओं में टकराव 

13 जुलाई को एनडीए की राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मू जयुपर आईं थी। उनके स्वागत कार्यक्रम में आदिवासी नेताओं की एंट्री को लेकर राज्यसभा सांसद किरोड़ीलाल मीणा और उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के बीच जमकर बहस हुई थी। सांसद मीणा आदिवासी जिलों के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम में शामिल नहीं होने देने पर नाराज हो गए थे। उन्होंने राजेंद्र राठौड़ को जमकर खरी-खोटी सुनाई। इसके जवाब में राठौड़ ने उनसे कहा कि आप अपना लहजा सुधारकर बात करें। काफी देर हुई बहस के बाद केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बीच-बचाव कर दोनों को शांत करवाया। बाद में मीणा और राठौड़ ने कहा कि हम दोनों भाई-भाई हैं। 

 

पायलट के विरोध में खड़ा हुआ गहलोत गुट 

कांग्रेस को नए अध्यक्ष की तलाश थी, इसके लिए पार्टी आलाकमान के सबसे करीबी राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत का नाम सामने आया। इसके बाद प्रदेश के नए सीएम को लेकर कवायद शुरू हुई। उधर, गहलोत सीएम पद छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। पायलट को सीएम बनाए जाने के खिलाफ गहलोत गुट खुलकर सामने आ गया था। 25 सितंबर को कांग्रेस आलाकमान ने तत्कालीन प्रदेश प्रभारी अजय माकन और मल्लिकार्जुन खरगे को पर्यवेक्षक बनाकर विधायक दल की बैठक के लिए राजस्थान भेजा। लेकिन, विधायकों ने बैठक से दूरी बनाई और आलाकमान के निर्देशों की अवहेलना की। तीन वरिष्ठ विधायकों के घर पर बैठक कर उन्होंने गहलोत पर भरोसा जताया। कहा- गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष बन जाएं, लेकिन सीएम पद पर भी बने रहे। करीब 90 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के आवास पर जाकर उन्हें इस्तीफा सौंप दिया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच विधायक दल की बैठक टाल दी गई और अगले दिन दोनों पर्यवेक्षक दिल्ली वापस लौट गए। इस घटनाक्रम के बाद पायलट सीएम बनते-बनते रह गए। 

गहलोत ने पायलट को कह दिया ‘गद्दार’ 

24 नवंबर को सीएम अशोक गहलोत ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में पायलट को गद्दार कह दिया। सीएम ने कहा, वे मुख्यमंत्री नहीं बनाए जा सकते। उन्हें दस विधायकों का भी समर्थन नहीं है। उन्हें कोई स्वीकार नहीं करेगा। पायलट की गद्दारी को मैंने और हमारे विधायकों ने भुगता है। हमें 34 दिन होटलों में रहना पड़ा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान भी इसमें शामिल थे। गहलोत के बयान का सचिन पायलट ने पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि इस तरह के अनुभवी व्यक्ति को ऐसे शब्द शोभा नहीं देते। गहलोत मुझे निकम्मा, नाकारा, गद्दार और न जाने क्या-क्या कह रहे हैं, लेकिन ऐसी भाषा बोलना मेरी परवरिश का हिस्सा नहीं रही। मेरा बार-बार नाम लेने, कीचड़ उछालने और आरोप-प्रत्यारोप करने से कोई फायदा नहीं होने वाला। कोई नेता इतना अनुभव रखता हो, वरिष्ठ हो और जिसे पार्टी ने इतना कुछ दिया हो, उसके लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना शोभा नहीं देता। 

This News is Updated by Khabre Fatafat
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