Politics: AAP नेता मीनाक्षी ने कहा- खाद्य सामग्री का खोना गहलोत सरकार की नाकामी, जनता से माफी मांगे

0
20
आप नेता मीनाक्षी जैदी

आप नेता मीनाक्षी जैदी
– फोटो : अमर उजाला

ख़बर सुनें

राजस्थान में आप नेता मीनाक्षी जैदी ने पत्रकार वार्ता के दौरान केंद्र और राज्य सरकार पर जुबानी हमला किया। जैदी ने कहा, गहलोत सरकार खाद्य सुरक्षा योजना के तहत उपलब्ध होने वाले अनाज को भुखमरी के शिकार लोगों तक पहुंचाने में नाकाम है। आम आदमी पार्टी राजस्थान का आरोप है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 46 हजार टन अनाज लैप्स हुआ, क्योंकि सरकार राशन का वितरण का काम ठीक से नहीं कर पाई।

मीनाक्षी ने कहा, शर्मनाक बात यह है कि इसकी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खचरियावास की बनती है। लेकिन सरकार के मंत्री अधिकारियों को दोषी ठहराकर खुद जिम्मेदारी से भाग जाना चाहते हैं। हमारी मांग है कि राजस्थान में इस संबंध में एक खाद्य सुरक्षा की हाई पावर कमेटी बने, जिसके अध्यक्ष रिटायर्ड हाई कोर्ट जज हों। इसमें सिविल सोसाइटी के लोगों को जोड़ा जाए और इस फील्ड के एक्सपर्ट्स भी शामिल हों। ऐसी कमेटी की देखरेख में खाद्य सामग्री का वितरण होना चाहिए।

पांच साल में जनता का कोई काम नहीं हुआ…
आम आदमी पार्टी नेता और पूर्व राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी मीनाक्षी सेठी जैदी ने आरोप लगाया कि राजस्थान में पिछले पांच साल में जनता का कोई काम नहीं हुआ। महज जोड़-तोड़, गुटबाजी, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद की राजनीति चली है। आज भी खाचरियावास अधिकारियों की एसीआर लिखने के अधिकार दिए जाने की मांग उठाकर अपने नाकारापन पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं। जैदी ने कहा, इस लैप्स के कारण जिस गरीब जनता को जो दिक्कत पेश आई है। उनसे सरकार माफी मांगे और आगे ऐसी समस्या नहीं होगी, उसके लिए क्या उपाय किए गए हैं, उसका प्लान जनता के सामने रखे।

जैदी ने कहा कि सरकार की नाकामी एक खाद्य के मोर्चे पर ही नहीं है, बल्कि कानून व्यवस्था, बिजली-पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में हालात और भी ज्यादा खराब हैं। लेकिन खाद्य एवं आपूर्ति के मोर्चे पर असलियत जनता के सामने लाने की जरूरत है। इन बिंदुओं से समझिए सरकार की नाकामियां…

  • राजस्थान में 46 हजार टन गेहूं लैप्स हो गया। क्योंकि सरकार द्वारा उसको काम में लेने का सर्टिफिकेट नहीं दिया गया। इस गेहूं से 92 लाख लोग (5 किलो प्रति व्यक्ति) अपने अधिकार से वंचित हो गए। समस्याएं और भी हैं, जिनके चलते भुखमरी की कगार पर बैठे लोगों तक अनाज नहीं पहुंच पा रहा है।
  • हजारों लोग खाद्य सुरक्षा योजना में पंजीकारण नहीं करवा पा रहे, क्योंकि तीन स्तरों पर वेरिफिकेशन होता है। (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, उपखण्ड स्तर), ये एक जटिल प्रक्रिया है।
  • लाखों लोग जो पहले से पंजीकृत हैं, उन्हें गेहूं और राशन नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि या तो मशीन उनके फिंगर प्रिंट्स को रीड नहीं कर पाती (गरीब, मज़दूरों के फिंगर प्रिंट्स काम करने से बदल जाते हैं) या फिर राशन दुकान वाला उनसे सहयोग नहीं करता या अपात्र लोगों को पंजीकृत कर दिया गया है। शादी होते ही लोग अलग राशन कार्ड बना कर दोहरा फायदा उठाते हैं। उस पर सरकार का ये गैर ज़िम्मेदाराना रवैया प्रशासनिक विफलता है।

जैदी का गहलोत सरकार को सुझाव…

  • इस संबंध में एक खाद्य सुरक्षा हाई पावर कमेटी बने, जिसके अध्यक्ष रिटायर्ड हाई कोर्ट जज हों। इसमें सिविल सोसाइटी के लोगों को जोड़ा जाए और इस फील्ड के एक्सपर्ट्स हों।
  • नीचे से मंत्री स्तर तक अनुमति कि समबद्ध व्यवस्था हो, जो ऑनलाइन हो। इसमें पता चल सके कि किस स्तर पर कितना टाइम लगा। लोक सेवा गारंटी अधिनियम मजाक बन कर रह गया है।
  • राशन कि दुकानों के खुलने और बंद होने का टाइम फिक्स हो और उसकी प्रॉपर मॉनिटरिंग  हो। राशन कि दुकानों पर गेहूं के साथ साथ चावल, दाल और तेल भी मिलना चाहिए।

विस्तार

राजस्थान में आप नेता मीनाक्षी जैदी ने पत्रकार वार्ता के दौरान केंद्र और राज्य सरकार पर जुबानी हमला किया। जैदी ने कहा, गहलोत सरकार खाद्य सुरक्षा योजना के तहत उपलब्ध होने वाले अनाज को भुखमरी के शिकार लोगों तक पहुंचाने में नाकाम है। आम आदमी पार्टी राजस्थान का आरोप है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 46 हजार टन अनाज लैप्स हुआ, क्योंकि सरकार राशन का वितरण का काम ठीक से नहीं कर पाई।

मीनाक्षी ने कहा, शर्मनाक बात यह है कि इसकी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खचरियावास की बनती है। लेकिन सरकार के मंत्री अधिकारियों को दोषी ठहराकर खुद जिम्मेदारी से भाग जाना चाहते हैं। हमारी मांग है कि राजस्थान में इस संबंध में एक खाद्य सुरक्षा की हाई पावर कमेटी बने, जिसके अध्यक्ष रिटायर्ड हाई कोर्ट जज हों। इसमें सिविल सोसाइटी के लोगों को जोड़ा जाए और इस फील्ड के एक्सपर्ट्स भी शामिल हों। ऐसी कमेटी की देखरेख में खाद्य सामग्री का वितरण होना चाहिए।

पांच साल में जनता का कोई काम नहीं हुआ…

आम आदमी पार्टी नेता और पूर्व राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी मीनाक्षी सेठी जैदी ने आरोप लगाया कि राजस्थान में पिछले पांच साल में जनता का कोई काम नहीं हुआ। महज जोड़-तोड़, गुटबाजी, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद की राजनीति चली है। आज भी खाचरियावास अधिकारियों की एसीआर लिखने के अधिकार दिए जाने की मांग उठाकर अपने नाकारापन पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं। जैदी ने कहा, इस लैप्स के कारण जिस गरीब जनता को जो दिक्कत पेश आई है। उनसे सरकार माफी मांगे और आगे ऐसी समस्या नहीं होगी, उसके लिए क्या उपाय किए गए हैं, उसका प्लान जनता के सामने रखे।

जैदी ने कहा कि सरकार की नाकामी एक खाद्य के मोर्चे पर ही नहीं है, बल्कि कानून व्यवस्था, बिजली-पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में हालात और भी ज्यादा खराब हैं। लेकिन खाद्य एवं आपूर्ति के मोर्चे पर असलियत जनता के सामने लाने की जरूरत है। इन बिंदुओं से समझिए सरकार की नाकामियां…

  • राजस्थान में 46 हजार टन गेहूं लैप्स हो गया। क्योंकि सरकार द्वारा उसको काम में लेने का सर्टिफिकेट नहीं दिया गया। इस गेहूं से 92 लाख लोग (5 किलो प्रति व्यक्ति) अपने अधिकार से वंचित हो गए। समस्याएं और भी हैं, जिनके चलते भुखमरी की कगार पर बैठे लोगों तक अनाज नहीं पहुंच पा रहा है।
  • हजारों लोग खाद्य सुरक्षा योजना में पंजीकारण नहीं करवा पा रहे, क्योंकि तीन स्तरों पर वेरिफिकेशन होता है। (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, उपखण्ड स्तर), ये एक जटिल प्रक्रिया है।
  • लाखों लोग जो पहले से पंजीकृत हैं, उन्हें गेहूं और राशन नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि या तो मशीन उनके फिंगर प्रिंट्स को रीड नहीं कर पाती (गरीब, मज़दूरों के फिंगर प्रिंट्स काम करने से बदल जाते हैं) या फिर राशन दुकान वाला उनसे सहयोग नहीं करता या अपात्र लोगों को पंजीकृत कर दिया गया है। शादी होते ही लोग अलग राशन कार्ड बना कर दोहरा फायदा उठाते हैं। उस पर सरकार का ये गैर ज़िम्मेदाराना रवैया प्रशासनिक विफलता है।

जैदी का गहलोत सरकार को सुझाव…

  • इस संबंध में एक खाद्य सुरक्षा हाई पावर कमेटी बने, जिसके अध्यक्ष रिटायर्ड हाई कोर्ट जज हों। इसमें सिविल सोसाइटी के लोगों को जोड़ा जाए और इस फील्ड के एक्सपर्ट्स हों।
  • नीचे से मंत्री स्तर तक अनुमति कि समबद्ध व्यवस्था हो, जो ऑनलाइन हो। इसमें पता चल सके कि किस स्तर पर कितना टाइम लगा। लोक सेवा गारंटी अधिनियम मजाक बन कर रह गया है।
  • राशन कि दुकानों के खुलने और बंद होने का टाइम फिक्स हो और उसकी प्रॉपर मॉनिटरिंग  हो। राशन कि दुकानों पर गेहूं के साथ साथ चावल, दाल और तेल भी मिलना चाहिए।

This News is Updated by Khabre Fatafat
नोट :- अन्य अपडेट लगातार पाने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें| आप हमें ट्वीटर पर भी फॉलो कर सकते हैं| आप हमारा एंड्राइड ऐप भी डाउनलोड कर सकते है|नवीनतम वीडियो न्यूज देखने के लिए हमें यूटूब (Youtube) पर सब्सक्राइब करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here