Ajmer Cow Fair: द्वारकाधीश की सवारी के नीचे से सफेद गाय के निकलते ही ग्रामीण खुश, सुख-समृद्धि का मिला संकेत

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केकड़ी के सांपला गांव में दीपोत्सव के तीसरे दिन अन्नकूट महोत्सव के दौरान गाय मेले का आयोजन किया गया। इस बार गाय मेले में करीब सात साल बाद सफेद गाय के द्वारकाधीश की सवारी के नीचे से निकलने से सुख-समृद्धि की उम्मीद जताई गई है। गाय मेले को देखने कई जिलों से श्रद्धालु आए। इस मेले में मान्यता है कि द्वारकाधीश की सवारी के नीचे से अगर गाय निकलती है तो जमाना अच्छा आता है। अच्छी बरसात होती है। खेती-बाड़ी को फायदा होता है। अगर गाय सवारी  के नीचे से नहीं निकलती, तो जमाना खराब आता है। अकाल के हालात हो जाते हैं।

600 साल पुरानी परंपरा

बुधवार को मेले के दौरान सवारी के नीचे से सफेद गाय के निकलने से मेले में शामिल होने आए पचास हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने खुशी जताई। सांपला का गाय मेला प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। गांव के 600 साल पुराने द्वारकाधीश गोपाल महाराज का यह गाय मेला अपने आप में इतिहास समेटे हुए है। कहते हैं कि दामोदरदास महाराज भगवान कृष्ण के भक्त थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर संवत 1474 में द्वारका से गोपाल महाराज गांव के बाहर से निकलने वाले रेवड़ में चितकबरे बैल की पैठ पर सवार होकर मूर्तियों के रूप में सांपला आकर दर्शन दिए। तभी से यह मेला भरा जा रहा है।

 

सवारी के नीचे से निकली सफेद गाय

गाय मेले के दिन मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान से हवन कराकर गोपाल महाराज को पंचामृत व यज्ञोपवित धारण कराई गई। हवन के बाद मंदिर के सभी पुजारी भगवान द्वारकाधीश गोपाल महाराज की सवारी लेकर मंदिर से रवाना हुए। गांव के मुख्य बाजार से होती हुई सवारी रावला चौक पहुंची। राजपूत समाज ने झांकी के दर्शन किए। फिर सवारी कीर्ति स्तंभ पहुंची। प्रदेशभर से आए श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ पड़े। मेला ग्राउंड में सैकड़ों गायों के झुंड के बीच-चांदी के ठीकरे से गायों के बीच घुमाया गया। इसके बाद एक सफेद गाय सवारी के नीचे से होकर निकली। सफेद गाय ठीकरे के पीछे-पीछे गोपाल महाराज मंदिर पहुंची और गोपाल महाराज के मंदिर से लड्डू खाया। मेले में मौजूद हजारों श्रृद्धालुओं ने भगवान गोपाल महाराज के जयकारों से माहौल को गुंजायमान कर दिया।

सवारी के नीचे से निकले भक्त

कीर्ति स्तंभ के पास गोपाल महाराज, केशवरायजी, राधिका की आरती मंदिर के महंत ओमप्रकाश शर्मा ने की। ढोल-नगाड़ों के साथ विभिन्न मार्गों से परिक्रमा के बाद भक्त हरका लाखा स्थल गोपालबाड़ी पहुंचे। इस दौरान प्रदेशभर से आए श्रद्धालुओं ने सवारी के नीचे से निकलकर भगवान से आशीर्वाद लिया। सवारी मुख्य मंदिर पहुंची, जहां मंदिर के पुजारी ने आरती कर अन्नकूट का भोग लगाया। 

This News is Updated by Khabre Fatafat
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