Ek Bharat Shreshtha Bharat: जनसंख्या असंतुलन के कारण कई देश खत्म हो गए, हमें स्व-तंत्र विकसित करना है: होसबोले

0
48
दत्तात्रेय होसबोले प्रबुद्ध जन सम्मेलन को संबोधित करते हुए।

दत्तात्रेय होसबोले प्रबुद्ध जन सम्मेलन को संबोधित करते हुए।
– फोटो : अमर उजाला

ख़बर सुनें

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने शनिवार को देश में जनसंख्या असंतुलन के विषय को उठाया। उन्होंने कहा कि कई देशों को जनसंख्या असंतुलन का नुकसान उठाना पड़ा है। कई देशों का अस्तित्व ही जनसंख्या असंतुलन की वजह से खत्म हो गया है। 

अजमेर के जवाहर रंगमंच मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,अजयमेरु द्वारा आयोजित प्रबुद्ध जन सम्मेलन में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत निर्माण में हमारी भूमिका’ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए होसबोले ने कहा कि भारत स्वाधीन तो हुआ है, किन्तु हमे ‘स्व-तंत्र’ विकसित करना होगा। भारत को सिर्फ राजनीतिक दृष्टि से आजादी नहीं चाहिए, हमें वैचारिक व बौद्धिक उपनिवेश से मुक्त होना होगा। उन्होंने प्रशासन व्यवस्था, न्याय प्रणाली, शिक्षा पद्धति, अर्थव्यवस्था सहित समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय विचार व दृष्टि पर आधारित व्यवस्था स्थापित करने का आह्वान किया, जिससे हर भारतीय राष्ट्रीय गौरव को महसूस कर सके। 

उन्होंने उपस्थित प्रबुद्ध जनों से महाभारत के एक श्लोक को ऊद्धरित करते हुए आग्रह किया कि देश को सन्मार्ग पर उन्मुख करना उनका कर्तव्य है। उन्होंने भारत के लगभग एक हजार वर्ष की परतंत्रता का, विशेषत:  250 वर्ष की अंग्रेजों की गुलामी का विषद विवेचन करते हुए भारत की स्वाधीनता हेतु प्रत्येक वर्ग के संघर्ष और उत्सर्ग का इतिहास सामने रखा। पिछले 75 वर्षों में स्वाधीन भारत ने विश्व में नई गौरवमय पहचान बनाई है। आज विश्व भारत की और आकर्षित है और उम्मीद की दृष्टि से देखता है। 

उन्होंने स्वदेशी, स्वावलंबन, अर्थ, कृषि, नई शिक्षा नीति, स्वास्थ्य, मतांतरण आदि विषयों पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि ‘जनसंख्या असंतुलन के कारण कई देशों का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। कई देश जनसंख्या वृद्धि को भार मानते हैं, किन्तु यह सही परिमाण में रहे तो देश की शक्ति भी है। चीन जैसे देश ने अपनी जनसंख्या नीति ही बदल दी है, क्योंकि राष्ट्र को युवाशक्ति चाहिए। इससे देश उद्यम व साहस के साथ प्रगति के मार्ग पर प्रशस्त रहे। हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे है। अगले 25 वर्ष हमें अमृतकाल समझकर कार्य करना है। भारत को श्रेष्ठ बनाने का दायित्व सिर्फ सरकार का नहीं है, भारत को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ बनाने हेतु हम सभी को अपनी भूमिका निभानी होगी।

 

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने शनिवार को देश में जनसंख्या असंतुलन के विषय को उठाया। उन्होंने कहा कि कई देशों को जनसंख्या असंतुलन का नुकसान उठाना पड़ा है। कई देशों का अस्तित्व ही जनसंख्या असंतुलन की वजह से खत्म हो गया है। 

अजमेर के जवाहर रंगमंच मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,अजयमेरु द्वारा आयोजित प्रबुद्ध जन सम्मेलन में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत निर्माण में हमारी भूमिका’ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए होसबोले ने कहा कि भारत स्वाधीन तो हुआ है, किन्तु हमे ‘स्व-तंत्र’ विकसित करना होगा। भारत को सिर्फ राजनीतिक दृष्टि से आजादी नहीं चाहिए, हमें वैचारिक व बौद्धिक उपनिवेश से मुक्त होना होगा। उन्होंने प्रशासन व्यवस्था, न्याय प्रणाली, शिक्षा पद्धति, अर्थव्यवस्था सहित समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय विचार व दृष्टि पर आधारित व्यवस्था स्थापित करने का आह्वान किया, जिससे हर भारतीय राष्ट्रीय गौरव को महसूस कर सके। 

उन्होंने उपस्थित प्रबुद्ध जनों से महाभारत के एक श्लोक को ऊद्धरित करते हुए आग्रह किया कि देश को सन्मार्ग पर उन्मुख करना उनका कर्तव्य है। उन्होंने भारत के लगभग एक हजार वर्ष की परतंत्रता का, विशेषत:  250 वर्ष की अंग्रेजों की गुलामी का विषद विवेचन करते हुए भारत की स्वाधीनता हेतु प्रत्येक वर्ग के संघर्ष और उत्सर्ग का इतिहास सामने रखा। पिछले 75 वर्षों में स्वाधीन भारत ने विश्व में नई गौरवमय पहचान बनाई है। आज विश्व भारत की और आकर्षित है और उम्मीद की दृष्टि से देखता है। 

उन्होंने स्वदेशी, स्वावलंबन, अर्थ, कृषि, नई शिक्षा नीति, स्वास्थ्य, मतांतरण आदि विषयों पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि ‘जनसंख्या असंतुलन के कारण कई देशों का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। कई देश जनसंख्या वृद्धि को भार मानते हैं, किन्तु यह सही परिमाण में रहे तो देश की शक्ति भी है। चीन जैसे देश ने अपनी जनसंख्या नीति ही बदल दी है, क्योंकि राष्ट्र को युवाशक्ति चाहिए। इससे देश उद्यम व साहस के साथ प्रगति के मार्ग पर प्रशस्त रहे। हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे है। अगले 25 वर्ष हमें अमृतकाल समझकर कार्य करना है। भारत को श्रेष्ठ बनाने का दायित्व सिर्फ सरकार का नहीं है, भारत को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ बनाने हेतु हम सभी को अपनी भूमिका निभानी होगी।

 

This News is Updated by Khabre Fatafat
नोट :- अन्य अपडेट लगातार पाने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें| आप हमें ट्वीटर पर भी फॉलो कर सकते हैं| आप हमारा एंड्राइड ऐप भी डाउनलोड कर सकते है|नवीनतम वीडियो न्यूज देखने के लिए हमें यूटूब (Youtube) पर सब्सक्राइब करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here