Invest Rajasthan: गहलोत के साथ मंच पर गौतम अडानी क्या आए, सियासत ही गरमा गई, भाजपा-कांग्रेस में शुरू हुई तकरार

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गौतम अडानी और अशोक गहलोत

गौतम अडानी और अशोक गहलोत
– फोटो : Social Media

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राजस्थान में निवेश आमंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इन्वेस्ट राजस्थान समिट का आयोजन किया। इसमें बड़े-बड़े उद्योगपतियों ने भाग लिया। इवेंट का हाइलाइट रहा उद्योगपति गौतम अडानी की मौजूदगी, जिन्होंने 65 हजार करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है। मंच पर गहलोत और अडानी ने एक-दूसरे के प्रति जो सम्मान दिखाया, उसे लेकर सियासत गरमा गई है। भाजपा ने इसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ अशोक गहलोत की मुखालफत बताया है। हालांकि, गहलोत ने इन्हें तवज्जो नहीं दी और भाजपा नेताओं की बयानबाजी को घिसा-पिटा बता दिया। 

दरअसल, कांग्रेसशासित राज्य में गौतम अडानी की मौजूदगी और निवेश की घोषणा चर्चा में है। एक बड़ी वजह है, राहुल गांधी का गौतम अडानी पर हमलावर होना। राहुल गांधी हर मौके पर नरेंद्र मोदी सरकार को घेरते हुए अडानी और अंबानी को दी जा रही सुविधाओं का जिक्र करते हैं। अब वही अडानी अगर कांग्रेस की सरकार वाले राज्य में निवेश करने पहुंचे हैं तो इसे राहुल की नाफरमानी बताया जा रहा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि कल तक जो था विरोधी, आज बना मनमीत। धन की जगी उम्मीद तो बदली अपनी रीत। 

विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री गहलोत ने तय कर लिया है कि जो भी आलाकमान कहेगा, उसका उल्टा करना है। इसी वजह से राहुल गांधी जिन गौतम अडानी को घेरे रहते हैं, उनके लिए गहलोत ने रेड कारपेट बिछाया और इन्वेस्ट करने के लिए आमंत्रित किया। विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौर ने तो पूरी समिट को बेकार और बोगस कह दिया। उन्होंने दावा किया कि कोई इन्वेस्टमेंट नहीं आने वाला। यह इवेंट दिखावे से अधिक कुछ नहीं। 

 

इसका जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि राजस्थान में 11 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं। प्रदेश अब इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली बन रहा है। दस लाख युवाओं को रोजगार मिलेगा। जो लोग इन्वेस्ट राजस्थान पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें बताना चाहिए कि कई व्यापारी किसी पार्टी में शामिल हो जाते हैं तो क्या वे दूसरे राज्यों में निवेश नहीं करते? अफसोस है कि भाजपा और मीडिया का एक तबका इस इवेंट की निगेटिव पब्लिसिटी कर रहा है। मुझे ये समझ नहीं आया कि भाजपा ने इस कार्यक्रम का विरोध क्यों किया। आप गहलोत का विरोध करिए, कांग्रेस का विरोध करिए पर राजस्थान के युवाओं के भविष्य के मौकों का विरोध क्यों कर रहे हैं?

विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री गहलोत ने तय कर लिया है कि जो भी आलाकमान कहेगा, उसका उल्टा करना है। इसी वजह से राहुल गांधी जिन गौतम अडानी को घेरे रहते हैं, उनके लिए गहलोत ने रेड कारपेट बिछाया और इन्वेस्ट करने के लिए आमंत्रित किया। विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौर ने तो पूरी समिट को बेकार और बोगस कह दिया। उन्होंने दावा किया कि कोई इन्वेस्टमेंट नहीं आने वाला। यह इवेंट दिखावे से अधिक कुछ नहीं। 

इसका जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि राजस्थान में 11 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं। प्रदेश अब इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली बन रहा है। दस लाख युवाओं को रोजगार मिलेगा। जो लोग इन्वेस्ट राजस्थान पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें बताना चाहिए कि कई व्यापारी किसी पार्टी में शामिल हो जाते हैं तो क्या वे दूसरे राज्यों में निवेश नहीं करते? अफसोस है कि भाजपा और मीडिया का एक तबका इस इवेंट की निगेटिव पब्लिसिटी कर रहा है। मुझे ये समझ नहीं आया कि भाजपा ने इस कार्यक्रम का विरोध क्यों किया। आप गहलोत का विरोध करिए, कांग्रेस का विरोध करिए पर राजस्थान के युवाओं के भविष्य के मौकों का विरोध क्यों कर रहे हैं?
 

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राजस्थान में निवेश आमंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इन्वेस्ट राजस्थान समिट का आयोजन किया। इसमें बड़े-बड़े उद्योगपतियों ने भाग लिया। इवेंट का हाइलाइट रहा उद्योगपति गौतम अडानी की मौजूदगी, जिन्होंने 65 हजार करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है। मंच पर गहलोत और अडानी ने एक-दूसरे के प्रति जो सम्मान दिखाया, उसे लेकर सियासत गरमा गई है। भाजपा ने इसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ अशोक गहलोत की मुखालफत बताया है। हालांकि, गहलोत ने इन्हें तवज्जो नहीं दी और भाजपा नेताओं की बयानबाजी को घिसा-पिटा बता दिया। 

This News is Updated by Khabre Fatafat
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