Rajasthan: गहलोत के एक और मंत्री को साधने के लिए पायलट का ट्वीट, जन्मदिन की बधाई चर्चा का विषय

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सचिन पायलट और बीडी कल्ला।

सचिन पायलट और बीडी कल्ला।
– फोटो : सोशल मीडिया

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सचिन पायलट का एक ट्वीट फिर से राजस्थान के बदलते मौसम में राजनीतिक गर्माहट लेकर आया है। दरअसल, राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीडी कल्ला के जन्मदिन के मौके पर सचिन पायलट का ट्वीट चर्चा का विषय बन गया है। 4 अक्टूबर शाम 6 बजकर 57 मिनट पर किया गया पायलट का ट्वीट, जिसमें पायलट ने बीडी कल्ला को जन्मदिवस की बधाई देते हुए उनकी दीर्घ आयु की कमाना की है। जिसके जवाब में मंत्री ने भी पायलट को धन्यावाद दिया और ट्वीट का जवाब दिया। 

यह एक ऐसा वाक्य है जिसमें सचिन पायलट ने सार्वजानिक रूप से मंत्री को बधाई दे डाली। वैसे जन्मदिन पर एक दूसरे को बधाई देना बड़ा आम है, परंतु राजस्थान के सियासी हंगामे में जहां एक तरफ सभी विधायक पायलट के खिलाफ लामबंद है। दूसरी तरफ इस परिस्थिति में पहले प्रताप सिंह खाचरियावास के घर पहुंचना और मंत्री को ट्वीट कर साधने का प्रयास करना राजस्थान की राजनीति में सीधे संकेत दे रहा है कि पायलट भी चुप बैठने वालों में नहीं हैं।

पायलट हर उस नेता से अपनी दूरियां खत्म करने पर लगे हुए हैं जो पायलट के विरोध में गहलोत के खेमे में हैं या इसको यू भी देखा जा सकता है कि पायलट मंत्रियों और विधायकों के दिल में छुपे डर को खत्म कर अपनापन बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। दिल्ली में सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद पायलट के निरंतर प्रयासों से ऐसा प्रतीत होता है कि सचिन पायलट किसी ऐसे टास्क पर हैं जो सिर्फ आलाकमान और पायलट के बीच की बात है या फिर पायलट भी आलाकमान को यह बताने में लगे हैं कि उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है। 

राजस्थान में पायलट के सामने मुख्यमंत्री गहलोत खड़े हैं जिनका व्यक्तित्व और संबंध दोनों ही सचिन पायलट से बिल्कुल विपरीत है। जहां पायलट युवा जोश वाले नेता हैं तो गहलोत तजुर्बाकार और शांत नेता हैं। सचिन पायलट के मन की बात उनके चेहरे पर आ जाती है, जबकि मुख्यमंत्री गहलोत को 50 साल बाद भी समझना मुश्किल है। गहलोत का किसी से कोई बेर नहीं, परंतु गहलोत के ही द्वारा बड़े नेताओं की फाइल बंद हुई है, पर चेहरे पर कुछ नहीं दिखाई दिया। जिसके कारण गहलोत का राजस्थान में कोई जातीय समीकरण नहीं होने के बाद भी वह तीसरी बार मुख्यमंत्री हैं। हालांकि जब तक कांग्रेस में गुटबाजी रहेगी तब तक पार्टी को इसका नुकसान भी हो सकता है। 

विस्तार

सचिन पायलट का एक ट्वीट फिर से राजस्थान के बदलते मौसम में राजनीतिक गर्माहट लेकर आया है। दरअसल, राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीडी कल्ला के जन्मदिन के मौके पर सचिन पायलट का ट्वीट चर्चा का विषय बन गया है। 4 अक्टूबर शाम 6 बजकर 57 मिनट पर किया गया पायलट का ट्वीट, जिसमें पायलट ने बीडी कल्ला को जन्मदिवस की बधाई देते हुए उनकी दीर्घ आयु की कमाना की है। जिसके जवाब में मंत्री ने भी पायलट को धन्यावाद दिया और ट्वीट का जवाब दिया। 

यह एक ऐसा वाक्य है जिसमें सचिन पायलट ने सार्वजानिक रूप से मंत्री को बधाई दे डाली। वैसे जन्मदिन पर एक दूसरे को बधाई देना बड़ा आम है, परंतु राजस्थान के सियासी हंगामे में जहां एक तरफ सभी विधायक पायलट के खिलाफ लामबंद है। दूसरी तरफ इस परिस्थिति में पहले प्रताप सिंह खाचरियावास के घर पहुंचना और मंत्री को ट्वीट कर साधने का प्रयास करना राजस्थान की राजनीति में सीधे संकेत दे रहा है कि पायलट भी चुप बैठने वालों में नहीं हैं।

पायलट हर उस नेता से अपनी दूरियां खत्म करने पर लगे हुए हैं जो पायलट के विरोध में गहलोत के खेमे में हैं या इसको यू भी देखा जा सकता है कि पायलट मंत्रियों और विधायकों के दिल में छुपे डर को खत्म कर अपनापन बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। दिल्ली में सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद पायलट के निरंतर प्रयासों से ऐसा प्रतीत होता है कि सचिन पायलट किसी ऐसे टास्क पर हैं जो सिर्फ आलाकमान और पायलट के बीच की बात है या फिर पायलट भी आलाकमान को यह बताने में लगे हैं कि उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है। 

राजस्थान में पायलट के सामने मुख्यमंत्री गहलोत खड़े हैं जिनका व्यक्तित्व और संबंध दोनों ही सचिन पायलट से बिल्कुल विपरीत है। जहां पायलट युवा जोश वाले नेता हैं तो गहलोत तजुर्बाकार और शांत नेता हैं। सचिन पायलट के मन की बात उनके चेहरे पर आ जाती है, जबकि मुख्यमंत्री गहलोत को 50 साल बाद भी समझना मुश्किल है। गहलोत का किसी से कोई बेर नहीं, परंतु गहलोत के ही द्वारा बड़े नेताओं की फाइल बंद हुई है, पर चेहरे पर कुछ नहीं दिखाई दिया। जिसके कारण गहलोत का राजस्थान में कोई जातीय समीकरण नहीं होने के बाद भी वह तीसरी बार मुख्यमंत्री हैं। हालांकि जब तक कांग्रेस में गुटबाजी रहेगी तब तक पार्टी को इसका नुकसान भी हो सकता है। 

This News is Updated by Khabre Fatafat
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