
प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : Social Media
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कोटा में रावण का किरदार निभाने वाले दस कलाकार अब एक मंच पर आकर समाजिक बुराइयों से लड़ेंगे। इसके लिए उन्होंने संगठन बनाया है। कोटा के दशहरा मैदान में 1994 से आयोजित रामलीला में रावण की भूमिका निभा रहे राजाराम जैन (46) ने मंगलवार को रामधाम आश्रम में ‘कर्मयोगी रावण सरकार’ के गठन की घोषणा की।
जैन ने 10 अन्य रावण की भूमिका निभाने वाले एक्टर के साथ इस संगठन की स्थापना की है। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए काम करने और भारतीय संस्कृति और विरासत की महिमा को पुर्नजीवित करना है। कर्मयोगी सेवा संस्थान के संस्थापक और अध्यक्ष जैन ने कहा कि ‘दुनिया ने रामायण में केवल एक रावण देखा था लेकिन वर्तमान समय में, आतंकवाद, उग्रवाद और भ्रष्टाचार के रूप में कई रावण अस्तित्व में हैं। इसलिए हमने बुराई के प्रतीक रावण को राम के दिखाए रास्ते पर लाने का फैसला किया है।
6,317 शवों का किया अंतिम संस्कार
2007 में गठित कर्मयोगी सेवा संस्थान, एक ऐसा संगठन है जो लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करता है। कोटा में अपने मृतक प्रियजनों के दाह संस्कार के साथ निराश्रित परिवारों की मदद भी कर रहा है। संस्थान ने 6,317 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने का दावा किया है और लगभग 70,000 शवों के अंतिम संस्कार की सुविधा भी दी है।
भिक्षावृति उन्मूलन पर भी देंगे जोर
जैन ने कहा कि इसी तर्ज पर नवगठित ‘कर्मयोगी रावण सरकार’ भी यह काम करेगी। केंद्र से ऐसे परिवारों की मदद के लिए एक विभाग स्थापित करने की मांग करेगी क्योंकि देश में हजारों लोग अभी भी सम्मानजनक अंतिम विदाई से वंचित हैं। रावण ने भिखारी के भेष में माता सीता का हरण किया था और आज भी इस भेष में कई अवैध, अनैतिक और राष्ट्र विरोधी कार्य किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन देश से भीख मांगने के उन्मूलन के लिए एक विधेयक लाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव डालेगी। इसके लिए एक योजना और रणनीति की सिफारिश करेगी।
देशभर से चुने जाएंगे अभिनेता
एसोसिएशन के 10 संस्थापक सदस्य क्षेत्र के कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिलों के अभिनेता हैं, जो रामलीला में मंच पर रावण की भूमिका निभाते हैं। जैन ने कहा कि अब अन्य सदस्यों को अभिनेताओं को देश भर से राज्य विधानसभा के हिसाब से चुना जाएगा।
जैन ने कहा कि 2024 में अयोध्या मंदिर में गर्भगृह में राम लला की स्थापना के दिन, एसोसिएशन के तत्वावधान में ये सभी कलाकार मानव इतिहास में अब तक की गई गलतियों पर पश्चाताप करेंगे। कर्मयोगी रावण सरकार ने रावण के पुतलों की एक निश्चित ऊंचाई तय करने और रावण के मिट्टी के पुतले बनाकर दशहरा मनाने के पर्यावरण के अनुकूल तरीके का चयन करने की भी वकालत की।
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