Rajasthan Political: आलाकमान के निर्देश नेता चुप रहें, हलचल की संभावना!, गहलोत से रविवार को गलती हुई या आज

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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत।
– फोटो : ANI

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राजस्थान के सियासी हंगामे में आज शुक्रवार को एक बार फिर केसी वेणुगोपाल के बयान ने फूस के ढेर में चिंगारी का काम किया है। दिल्ली से लेकर जयपुर तक एक बार फिर सियासी उठापटक तेज हो गई है। सियासी बयानबाजी के दौर में वेणुगोपाल की चिट्टी जिसमें राजस्थान का नाम लेकर नेताओं को अनुरोध नहीं आदेश दिया गया है कि पार्टी और पार्टी लीडर शिप के विषय में बात करने से पहले सोच लें, नहीं तो कड़ी करवाई हो सकती है।

यह सब अजय माकन को राजस्थान के नेताओं द्वार घेरे जाने के बाद हुआ। कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी ने स्पष्ट आदेश दिए कि किसी भी लीडर के खिलाफ कुछ भी बर्दास्त नहीं किया जाएगा। यह पत्र मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सोनिया गांधी से मिलने के बाद सामने आया है जिसके बाद गहलोत खेमा कमजोर नजर आ रहा है।  

पूरे एपिसोड को देखें तो सुबह जोधपुर हाउस ने निकलते समय मुख्यमंत्री गहलोत के चेहरे पर कोई तनाव नहीं था। मुख्यमंत्री गहलोत सोनिया गांधी से मिलने के पहुंचे तब उनकी बॉडी लैंग्वेज पॉजिटिव नजर आ रही थी। उनके चेहरे पर एक सकून था कि सब ठीक होने जा रहा है। लगभग 1 घंटे 30 मिनिट चली मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए गहलोत काफी थके हुए और तनाव में नजर आए, जो सोनिया से मुलाकात में सब कुछ ठीक नहीं की बात दर्शा रही थी। 

राजनीत गलियारों और विशेषज्ञों की राय में भी यह तय करना मुश्किल लग रहा है कि कहीं माफी मांग कर गलती तो नहीं हो गई। रविवार को विधायकों के विरोध के बाद आलाकमान बैकफुट पर नजर आ रहा था, क्योंकि अगर सब समय पर नहीं निपटाए जाता तो राजस्थान को सोने की थाली में सजा कर भाजपा को दे दिया जाना तय था, फिर चाहे मध्य अवधि चुनाव होते यह कुछ। 

इस डर से अजय माकन का भी बयान आया, रिपोर्ट पेश हुई तो गहलोत को क्लीन चिट तक दे दी गई थी। आलाकमान सुनने को भी तैयार था, परंतु आज मुख्यमंत्री गहलोत के सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद अचानक ही आलाकमान मजबूत नजर आने लगा है। गहलोत के बयान के बाद वेणुगोपाल का बयान आलाकमान की मजबूती को दर्शाता है और ये चिट्ठी गहलोत को कमजोर और आलाकमान को मजबूत दर्शा रही है।

विस्तार

राजस्थान के सियासी हंगामे में आज शुक्रवार को एक बार फिर केसी वेणुगोपाल के बयान ने फूस के ढेर में चिंगारी का काम किया है। दिल्ली से लेकर जयपुर तक एक बार फिर सियासी उठापटक तेज हो गई है। सियासी बयानबाजी के दौर में वेणुगोपाल की चिट्टी जिसमें राजस्थान का नाम लेकर नेताओं को अनुरोध नहीं आदेश दिया गया है कि पार्टी और पार्टी लीडर शिप के विषय में बात करने से पहले सोच लें, नहीं तो कड़ी करवाई हो सकती है।

यह सब अजय माकन को राजस्थान के नेताओं द्वार घेरे जाने के बाद हुआ। कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी ने स्पष्ट आदेश दिए कि किसी भी लीडर के खिलाफ कुछ भी बर्दास्त नहीं किया जाएगा। यह पत्र मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सोनिया गांधी से मिलने के बाद सामने आया है जिसके बाद गहलोत खेमा कमजोर नजर आ रहा है।  

पूरे एपिसोड को देखें तो सुबह जोधपुर हाउस ने निकलते समय मुख्यमंत्री गहलोत के चेहरे पर कोई तनाव नहीं था। मुख्यमंत्री गहलोत सोनिया गांधी से मिलने के पहुंचे तब उनकी बॉडी लैंग्वेज पॉजिटिव नजर आ रही थी। उनके चेहरे पर एक सकून था कि सब ठीक होने जा रहा है। लगभग 1 घंटे 30 मिनिट चली मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए गहलोत काफी थके हुए और तनाव में नजर आए, जो सोनिया से मुलाकात में सब कुछ ठीक नहीं की बात दर्शा रही थी। 

राजनीत गलियारों और विशेषज्ञों की राय में भी यह तय करना मुश्किल लग रहा है कि कहीं माफी मांग कर गलती तो नहीं हो गई। रविवार को विधायकों के विरोध के बाद आलाकमान बैकफुट पर नजर आ रहा था, क्योंकि अगर सब समय पर नहीं निपटाए जाता तो राजस्थान को सोने की थाली में सजा कर भाजपा को दे दिया जाना तय था, फिर चाहे मध्य अवधि चुनाव होते यह कुछ। 

इस डर से अजय माकन का भी बयान आया, रिपोर्ट पेश हुई तो गहलोत को क्लीन चिट तक दे दी गई थी। आलाकमान सुनने को भी तैयार था, परंतु आज मुख्यमंत्री गहलोत के सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद अचानक ही आलाकमान मजबूत नजर आने लगा है। गहलोत के बयान के बाद वेणुगोपाल का बयान आलाकमान की मजबूती को दर्शाता है और ये चिट्ठी गहलोत को कमजोर और आलाकमान को मजबूत दर्शा रही है।

This News is Updated by Khabre Fatafat
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