Rajasthan Politics: पायलट की जल्दबाजी एक बार फिर ले डूबी, गहलोत खेमे के विधायकों को मंजूर नहीं सचिन

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अशोक गहलोत और सचिन पायलट

अशोक गहलोत और सचिन पायलट
– फोटो : Social Media

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राजस्थान में पिछले तीन से चल रहे असमंजस की स्थिति आज शाम होते होते विधानसभा अध्यक्ष के घर पर इस्तीफे के साथ ही साफ हो गया है कि गहलोत के मुकाबले सचिन पायलट किसी को भी पसंद और बर्दास्त नहीं है।

पिछले दिनों मैं अशोक गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष के नामांकन की बात की पुष्टि होते ही कांग्रेस मैं दिल्ली और राजस्थान मैं मुख्यमंत्री के नाम को लेकर अटकलों का दौर शुरू होने लग पड़ा था, जिसमें सचिन पायलट के समर्थकों द्वार निरंतर और उग्र रूप से पायलट की दावेदारी को प्रबल बताया जाने लगे था, कुछ तो सचिन पायलट को मुख्यमंत्री तक घोषित कर चुके थे और नवरात्रि मैं शपथ लेने तक कि बात शुरू हो चुकी थी, सचिन पायलट समर्थकों की तरफ से राहुल गांधी द्वार सचिन पायलट के नाम को फाइनल करने तक की बात कही जा रही थी।

सूत्र बताते है कि सचिन समर्थक ही नहीं सचिन भी खुद को मुख्यमंत्री के ही रूप मैं प्रस्तुत और व्यवहार करने लगे थे, गहलोत खेमे के विधायकों से भी संपर्क साधे जाने लगे थे जिस पर गहलोत और उनके समर्थकों की कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई थी, लेकिन जब ऑब्जर्वर अपॉइंट कर विधायक दल की बैठक के लिए जयपुर भेजे गए ठीक उस समय ही रणनीति तय हो चुकी थी।

दरअसल मिली जानकरी के अनुसार सोनिया गांधी को गहलोत द्वारा अपना या फिर सीपी जोशी का नाम दिया था, जबकि राहुल गांधी ने गहलोत और पायलट में से कोई भी। लेकिन सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया था। सचिन पायलट और समर्थकों के द्वारा की गई जल्दबाजी के चलते आलाकमान कोई भी फैसला लेती उससे पहेले ही विधायकों को निरंतर उकसा रहे पायलट समर्थकों पर भारी पड़ गया है।

रविवार को जब पर्यवेक्षक जयपुर पहुंचे तो मुख्यमंत्री गहलोत तनोट माता के मंदिर पहुंच गए और विधायकों को बैठक के लिए मुख्यमंत्री आवास पर  शाम को 7 बजे पहुंचना था, जहां पर एक लाइन का प्रस्ताव पास होना था वो था कि हम को मुख्यमंत्री के चुनाव के लिए आलाकमान पर भरोसा है,  जिसको लेकर विधायकों और मंत्रियों में बड़ी खलबली मच गई। शाम होते होते 92 विधायक चुपचाप मंत्री शांति धारीवाल के निवास पर एकत्र होने लगे और एकसाथ विधानसभा अध्यक्ष के घर पहुंच कर अपना इस्तीफा सौंप दिया जिसके चलते अब विधायक दल की बैठक नहीं की जा सकी है।  

विधायकों का कहना स्पष्ट है कि जब पायलट ने सरकार गिराने की कोशिश की थी जब 102 विधायकों ने सरकार को बचाया था, जिसका इनाम मिलने की जगह पायलट को पुरस्कृत कर प्रताड़ित किया जा रहा है।  

सभी विधायकों का कहना है कि या तो गहलोत नहीं तो सीपी जोशी या 102 विधायकों में से कोई भी स्वीकार है, परंतु सचिन पायलट नहीं, सूत्रों के अनुसार, आलाकमान को अंदेशा था कि 20 अक्तूबर को तो गहलोत ही आलाकमान हो जाएंगे तब ये सम्भव नहीं होगा इसलिए अभी करना होगा जो कि उल्टा पड़ गया है। 

हांलाकि सोनिया गांधी के कहने पर गहलोत से बात की गई पर गहलोत बोले कि ये मेरे बस मे नहीं है, विधायक अपना इस्तीफा सौप कर विधानसभा अध्यक्ष के घर के बाहर खड़ी बस मै सवार होकर बाड़े बंदी में जाने को तैयार है। राजस्थान में एक बात फिर स्पष्ट हो गई है कि मुख्यमंत्री कोई भी हो पर  सचिन पायलट की मुख्यमंत्री बनने की सम्भावना एक बार फिर खत्म होती नजर आ रही है।

विस्तार

राजस्थान में पिछले तीन से चल रहे असमंजस की स्थिति आज शाम होते होते विधानसभा अध्यक्ष के घर पर इस्तीफे के साथ ही साफ हो गया है कि गहलोत के मुकाबले सचिन पायलट किसी को भी पसंद और बर्दास्त नहीं है।

पिछले दिनों मैं अशोक गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष के नामांकन की बात की पुष्टि होते ही कांग्रेस मैं दिल्ली और राजस्थान मैं मुख्यमंत्री के नाम को लेकर अटकलों का दौर शुरू होने लग पड़ा था, जिसमें सचिन पायलट के समर्थकों द्वार निरंतर और उग्र रूप से पायलट की दावेदारी को प्रबल बताया जाने लगे था, कुछ तो सचिन पायलट को मुख्यमंत्री तक घोषित कर चुके थे और नवरात्रि मैं शपथ लेने तक कि बात शुरू हो चुकी थी, सचिन पायलट समर्थकों की तरफ से राहुल गांधी द्वार सचिन पायलट के नाम को फाइनल करने तक की बात कही जा रही थी।

सूत्र बताते है कि सचिन समर्थक ही नहीं सचिन भी खुद को मुख्यमंत्री के ही रूप मैं प्रस्तुत और व्यवहार करने लगे थे, गहलोत खेमे के विधायकों से भी संपर्क साधे जाने लगे थे जिस पर गहलोत और उनके समर्थकों की कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई थी, लेकिन जब ऑब्जर्वर अपॉइंट कर विधायक दल की बैठक के लिए जयपुर भेजे गए ठीक उस समय ही रणनीति तय हो चुकी थी।

दरअसल मिली जानकरी के अनुसार सोनिया गांधी को गहलोत द्वारा अपना या फिर सीपी जोशी का नाम दिया था, जबकि राहुल गांधी ने गहलोत और पायलट में से कोई भी। लेकिन सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया था। सचिन पायलट और समर्थकों के द्वारा की गई जल्दबाजी के चलते आलाकमान कोई भी फैसला लेती उससे पहेले ही विधायकों को निरंतर उकसा रहे पायलट समर्थकों पर भारी पड़ गया है।

रविवार को जब पर्यवेक्षक जयपुर पहुंचे तो मुख्यमंत्री गहलोत तनोट माता के मंदिर पहुंच गए और विधायकों को बैठक के लिए मुख्यमंत्री आवास पर  शाम को 7 बजे पहुंचना था, जहां पर एक लाइन का प्रस्ताव पास होना था वो था कि हम को मुख्यमंत्री के चुनाव के लिए आलाकमान पर भरोसा है,  जिसको लेकर विधायकों और मंत्रियों में बड़ी खलबली मच गई। शाम होते होते 92 विधायक चुपचाप मंत्री शांति धारीवाल के निवास पर एकत्र होने लगे और एकसाथ विधानसभा अध्यक्ष के घर पहुंच कर अपना इस्तीफा सौंप दिया जिसके चलते अब विधायक दल की बैठक नहीं की जा सकी है।  

विधायकों का कहना स्पष्ट है कि जब पायलट ने सरकार गिराने की कोशिश की थी जब 102 विधायकों ने सरकार को बचाया था, जिसका इनाम मिलने की जगह पायलट को पुरस्कृत कर प्रताड़ित किया जा रहा है।  

सभी विधायकों का कहना है कि या तो गहलोत नहीं तो सीपी जोशी या 102 विधायकों में से कोई भी स्वीकार है, परंतु सचिन पायलट नहीं, सूत्रों के अनुसार, आलाकमान को अंदेशा था कि 20 अक्तूबर को तो गहलोत ही आलाकमान हो जाएंगे तब ये सम्भव नहीं होगा इसलिए अभी करना होगा जो कि उल्टा पड़ गया है। 

हांलाकि सोनिया गांधी के कहने पर गहलोत से बात की गई पर गहलोत बोले कि ये मेरे बस मे नहीं है, विधायक अपना इस्तीफा सौप कर विधानसभा अध्यक्ष के घर के बाहर खड़ी बस मै सवार होकर बाड़े बंदी में जाने को तैयार है। राजस्थान में एक बात फिर स्पष्ट हो गई है कि मुख्यमंत्री कोई भी हो पर  सचिन पायलट की मुख्यमंत्री बनने की सम्भावना एक बार फिर खत्म होती नजर आ रही है।

This News is Updated by Khabre Fatafat
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