Sikar: हौसले बुलंद, 35 पर्वतारोहियों में राजस्थान के इकलौते ललित ने द्रास की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया

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सीकर जिले में नीमकाथाना के अभय कॉलोनी निवासी ललित कुमार सैनी पुत्र बंशीधर सैनी ने अपने बुलंद हौसलों के साथ भारत में लद्दाख के द्रास क्षेत्र में स्थित मेचोई पीक पर तिरंगा फहराया है। उनकी इस उपलब्धि से उनके माता-पिता काफी खुश हैं।

बता दें कि ललित उभरता हुआ पर्वतारोही है, इन्होंने मेचोई पीक पर तिरंगा फहराया है, जिसकी ऊंचाई 17 हजार 907 फीट (5 हजार 458 मीटर) है। जवाहर इंस्टिट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) की ओर से आयोजित 24 दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम में भाग लिया था। पूरे देश से 36 प्रतिभागियों का ही सेलेक्शन किया गया था, जिसमें राजस्थान से ललित अकेला था।

ललित ने बताया, हमारी ट्रेनिंग पहलगाम सोनामार्ग मेचोई बेस कैंप और मेचोई ग्लेशियर पर हुई। यह पूरे 24 दिन की ट्रेनिग थी। मेचोई पीक पर जाने के लिए लगातार 12 घंटे तक चढ़ाई की। चढ़ाई को पूरा करने के दौरान ठंड तो एक बहुत बड़ी कठिनाई होती है। यह महीना पर्वतारोही को झमाझम बारिश और तेज हवा से रास्ता को अवरुद्ध करती है। 

उन्होंने बताया, पहाड़ों और ग्लेशियर में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। रास्ते में लैंड स्लाइड करेवास बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी समस्या  माइनस टेंपरेचर होता है। मेरा सपना सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह करने की है।

विस्तार

सीकर जिले में नीमकाथाना के अभय कॉलोनी निवासी ललित कुमार सैनी पुत्र बंशीधर सैनी ने अपने बुलंद हौसलों के साथ भारत में लद्दाख के द्रास क्षेत्र में स्थित मेचोई पीक पर तिरंगा फहराया है। उनकी इस उपलब्धि से उनके माता-पिता काफी खुश हैं।

बता दें कि ललित उभरता हुआ पर्वतारोही है, इन्होंने मेचोई पीक पर तिरंगा फहराया है, जिसकी ऊंचाई 17 हजार 907 फीट (5 हजार 458 मीटर) है। जवाहर इंस्टिट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) की ओर से आयोजित 24 दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम में भाग लिया था। पूरे देश से 36 प्रतिभागियों का ही सेलेक्शन किया गया था, जिसमें राजस्थान से ललित अकेला था।

ललित ने बताया, हमारी ट्रेनिंग पहलगाम सोनामार्ग मेचोई बेस कैंप और मेचोई ग्लेशियर पर हुई। यह पूरे 24 दिन की ट्रेनिग थी। मेचोई पीक पर जाने के लिए लगातार 12 घंटे तक चढ़ाई की। चढ़ाई को पूरा करने के दौरान ठंड तो एक बहुत बड़ी कठिनाई होती है। यह महीना पर्वतारोही को झमाझम बारिश और तेज हवा से रास्ता को अवरुद्ध करती है। 

उन्होंने बताया, पहाड़ों और ग्लेशियर में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। रास्ते में लैंड स्लाइड करेवास बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी समस्या  माइनस टेंपरेचर होता है। मेरा सपना सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह करने की है।

This News is Updated by Khabre Fatafat
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