जम्मू कश्मीर में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के सब इंस्पेक्टर ने सोमवार को आत्महत्या कर ली थी। रामदेव सिंह सीकर के श्रीमाधोपुर इलाके के रहने वाले थे। मंगलवार को गांव में उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। रामदेव की मौत से परिवार के लोग सदमे हैं। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि उन्होंने आत्महत्या क्यों की। सेना कोर्ट ऑफ इंक्वायरी से मामले की जांच करवा रही है। इधर, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रामदेव के बेटों ने उनकी आत्महत्या पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि हमें विश्वास ही नहीं है कि पापा ऐसा कर सकते हैं।
बीएसएफ जवान रामदेव सिंह के छोटे बेटे संदीप ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, पिताजी मार्च में एक महीने की छुट्टी लेकर गांव आए थे। वह हमेशा खुश रहते थे, कभी उन्हें निराश या गुस्सा करते हुए नहीं देखा। बीते शुक्रवार उनसे फोन पर भी बात हुई थी। उन्होंने किसी परेशानी का जिक्र नहीं किया और न ही वह परेशान लग रहे थे। उन्होंने यह भी बताया था कि चार-पांच दिन में छुट्टी लेकर वह घर आने वाले हैं। पिताजी खुद को गोली मार सकते हैं, इस बात पर भरोसा नहीं हो रहा है।
सीकर के श्रीमाधोपुर के रहने वाले रामदेव सिंह ने 1986 में बीएसएफ की 12वीं बटालियन में कांस्टेबल के पद पर नौकरी ज्वाइन की थी। 36 साल की नौकरी में देश के अलग हिस्सों में उनकी पोस्टिंग हुई। कुछ साल पहले उन्हें सब इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोट किया गया था। तीन साल से वह जम्मू कश्मीर में तैनात थे। साल 2000 में उनकी पत्नी की मौत हो गई थी। उनके दो बेटे हैं, बड़ा बेटा कुलदीप बीएसएफ में ही है। छोटा बेटा संदीप बिजली विभाग में कार्यरत है।
जानकारी के अनुसार रामदेव सिंह ने रविवार रात को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। उनका जूनियर सुबह उनके कमरे में गया तो उसने खून से लथपथ उनका शव पड़ा हुआ देखा। शव के पास ही एक गन भी रखी हुई थी और गले पर गोली का निशान भी है। ऐसे में माना जा रहा है कि उन्होंने गले पर गोली मारकर आत्महतया की है। हालांकि, रामदेव के साथ तैनात जवानों और उनके बेटों को भी विश्वास नहीं हो रहा है कि वह ऐसा कर सकते हैं। आत्महत्या का कारण जानने के लिए पुलिस मामले की जांच कर रही है। इसके अलावा सेना द्वारा कोर्ट ऑफ इंक्वायरी भी की जा रही है।
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