राजस्थान में बिजली संकट : 1970 मेगावाट की पांच इकाइयां बंद, चार से पांच दिन का ही कोयला स्टॉक शेष

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न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: रोमा रागिनी
Updated Mon, 09 May 2022 05:39 PM IST

सार

राजस्थान में बिजली संकट गहरा गया है। राज्य के उत्पादन इकाइयों में चार से पांच दिन का ही कोयला बचा हुआ है।

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राजस्थान की तपती गर्मी और भीषण तापमान के बीच बिजली का संकट गहराता जा रहा है । प्रदेश में 1970 मेगावाट क्षमता की पांच विद्युत उत्पादन इकाइयां बंद हैं। जबकि शेष इकाइयों में महज चार से पांच दिन का कोयला स्टॉक ही शेष बचा है। 
 

आम उपभोक्ताओं को बिजली कटौती से जल्द राहत मिलने के आसार कम ही है। पांच इकाइयां 1970 मेगावाट क्षमता की हैं, जो बंद हैं। इनमें 660 मेगावाट की सूरतगढ़ थर्मल सुपरक्रिटिकल, 600 मेगावाट की कालीसिंध, 210 मेगावाट की कोटा थर्मल और 250 मेगावाट क्षमता की सूरतगढ़ थर्मल और छबड़ा थर्मल विद्युत उत्पादन इकाई शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि 600 मेगावाट की कालीसिंध और 250 मेगावाट क्षमता की सूरतगढ़ थर्मल इकाई जल्द ही शुरू हो सकती है। इसमें सूरतगढ़ 250 मेगावाट की इकाई अगले दो दिन में शुरू होने की संभावना है. जबकि कालीसिंध थर्मल इकाई 15 मई तक उत्पादन शुरू कर देगी।

चार दिन का ही स्टॉक बचा

राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम की प्रदेश में कुल 23 उत्पादन इकाइयां हैं। जिसमें से वर्तमान में 18 इकाइयों में बिजली का उत्पादन हो रहा है। इन इकाइयों की क्षमता महज 5610 मेगावाट है लेकिन इसमें उत्पादन तीन से 4000 मेगावाट प्रतिदिन हो रहा है। वहीं इन उत्पादन इकाइयों में चार से पांच दिन का कोयला बचा हुआ है। नियमानुसार 20 से 25 दिन तक का कोयला स्टॉक में रहना जरूरी है। इसके बाद भी राजस्थान को प्रतिदिन 22 रैक कोयला मिल रहा है। जबकि जरूरत बहुत अधिक की है।

विस्तार

राजस्थान की तपती गर्मी और भीषण तापमान के बीच बिजली का संकट गहराता जा रहा है । प्रदेश में 1970 मेगावाट क्षमता की पांच विद्युत उत्पादन इकाइयां बंद हैं। जबकि शेष इकाइयों में महज चार से पांच दिन का कोयला स्टॉक ही शेष बचा है। 

 

आम उपभोक्ताओं को बिजली कटौती से जल्द राहत मिलने के आसार कम ही है। पांच इकाइयां 1970 मेगावाट क्षमता की हैं, जो बंद हैं। इनमें 660 मेगावाट की सूरतगढ़ थर्मल सुपरक्रिटिकल, 600 मेगावाट की कालीसिंध, 210 मेगावाट की कोटा थर्मल और 250 मेगावाट क्षमता की सूरतगढ़ थर्मल और छबड़ा थर्मल विद्युत उत्पादन इकाई शामिल हैं।


बताया जा रहा है कि 600 मेगावाट की कालीसिंध और 250 मेगावाट क्षमता की सूरतगढ़ थर्मल इकाई जल्द ही शुरू हो सकती है। इसमें सूरतगढ़ 250 मेगावाट की इकाई अगले दो दिन में शुरू होने की संभावना है. जबकि कालीसिंध थर्मल इकाई 15 मई तक उत्पादन शुरू कर देगी।

चार दिन का ही स्टॉक बचा

राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम की प्रदेश में कुल 23 उत्पादन इकाइयां हैं। जिसमें से वर्तमान में 18 इकाइयों में बिजली का उत्पादन हो रहा है। इन इकाइयों की क्षमता महज 5610 मेगावाट है लेकिन इसमें उत्पादन तीन से 4000 मेगावाट प्रतिदिन हो रहा है। वहीं इन उत्पादन इकाइयों में चार से पांच दिन का कोयला बचा हुआ है। नियमानुसार 20 से 25 दिन तक का कोयला स्टॉक में रहना जरूरी है। इसके बाद भी राजस्थान को प्रतिदिन 22 रैक कोयला मिल रहा है। जबकि जरूरत बहुत अधिक की है।

This News is Updated by Khabre Fatafat
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