न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Thu, 21 Apr 2022 10:21 PM IST
सार
पैर के टेढ़ेपन यानी क्लब फुट की बीमारी हजारों नवजात में से एक बच्चे को होती है। इस बीमारी से ग्रसित बच्चों को समय रहते इलाज मिले तो उन्हें आजीवन दिव्यांग होने से बचाया जा सकता है।
हजारों नवजात बच्चों में से एक बच्चे को पैर के टेढ़ेपन यानी क्लब फुट की बीमारी होती है। यह दुर्लभ बिमारियों में से एक है। इस बीमारी से ग्रसित अधिकांश बच्चे आजीवन दिव्यांग का जीवन जीने के लिए मजबूर हो सकते हैं। बच्चों के बड़े होने पर इसका इलाज मुश्किल हो जाता है और ऑपरेशन का विकल्प भी नहीं बन पाता है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का मानना है कि ऐसे लक्ष्णों वाले बच्चों का उपचार समय रहने हो जाना चाहिए। इससे उन्हें दिव्यांग बनने से बचाया जा सकता है।
जोधपुर जिले की पीपाड़ सिटी राजकीय जिला चिकित्सालय में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां 11 महीने पहले जन्मा बच्चा इसी बीमारी से पीड़ित था। स्थानीय चिकित्सालय में कार्यरत अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र चौधरी ने बच्चे में जन्मजात बीमारी को देखा तो उन्होने परिजनों को इलाज कराने की समझाइश दी। इसके बाद डॉ. राजेन्द्र चौधरी ने बच्चे का उपचार करना शुरू किया। 11 महीने की मेहनत के बाद बच्चे के पैर एक दम ठीक हो गए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि ग्राम घाणामगरा निवासी ओमप्रकाश के पुत्र हंसराज को जन्मजात पैर के टेढ़ेपन की बीमारी थी। ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. राजेंद्र चौधरी ने बच्चे का सफल उपचार किया है। बच्चे के ठीक होने पर उसके माता पिता भी काफी खुश हुए हैं। उनकी आंखों से आंसू छलक आए।
विस्तार
हजारों नवजात बच्चों में से एक बच्चे को पैर के टेढ़ेपन यानी क्लब फुट की बीमारी होती है। यह दुर्लभ बिमारियों में से एक है। इस बीमारी से ग्रसित अधिकांश बच्चे आजीवन दिव्यांग का जीवन जीने के लिए मजबूर हो सकते हैं। बच्चों के बड़े होने पर इसका इलाज मुश्किल हो जाता है और ऑपरेशन का विकल्प भी नहीं बन पाता है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का मानना है कि ऐसे लक्ष्णों वाले बच्चों का उपचार समय रहने हो जाना चाहिए। इससे उन्हें दिव्यांग बनने से बचाया जा सकता है।
जोधपुर जिले की पीपाड़ सिटी राजकीय जिला चिकित्सालय में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां 11 महीने पहले जन्मा बच्चा इसी बीमारी से पीड़ित था। स्थानीय चिकित्सालय में कार्यरत अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र चौधरी ने बच्चे में जन्मजात बीमारी को देखा तो उन्होने परिजनों को इलाज कराने की समझाइश दी। इसके बाद डॉ. राजेन्द्र चौधरी ने बच्चे का उपचार करना शुरू किया। 11 महीने की मेहनत के बाद बच्चे के पैर एक दम ठीक हो गए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि ग्राम घाणामगरा निवासी ओमप्रकाश के पुत्र हंसराज को जन्मजात पैर के टेढ़ेपन की बीमारी थी। ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. राजेंद्र चौधरी ने बच्चे का सफल उपचार किया है। बच्चे के ठीक होने पर उसके माता पिता भी काफी खुश हुए हैं। उनकी आंखों से आंसू छलक आए।
This News is Updated by Khabre Fatafat
नोट :- अन्य अपडेट लगातार पाने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें| आप हमें ट्वीटर पर भी फॉलो कर सकते हैं| आप हमारा एंड्राइड ऐप भी डाउनलोड कर सकते है|नवीनतम वीडियो न्यूज देखने के लिए हमें यूटूब (Youtube) पर सब्सक्राइब करें।