न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Thu, 24 Mar 2022 09:44 PM IST
सार
उन्होंने कहा कि हमने मान लिया है कि पेपर लीक होंगे और हम 10 साल सजा देंगे और 10 करोड़ का जुर्माना वसूलेंगे। आप शासन लेकर बैठे हैं। आप में नैतिक बल होना चाहिए कि आगे पेपर लीक नहीं होने देंगे।
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विस्तार
पिछले दिनों कैबिनेट बैठक में जो वाक्या हुआ उस पूरी बैठक का ब्यौरा छप गया, कैबिनेट की बैठक की गोपनीयता किसने भंग की। अब तक यह पता नहीं लगा कि कैबिनेट की गोपनीयता किस मंत्री अफसर ने भंग की है। फिर हम लाचारी या अपनी कमजोरी दिखा रहे हैं। हमने मान लिया है कि पेपर लीक होंगे।
उन्होंने कहा कि हम 10 साल सजा देंगे और 10 करोड़ का जुर्माना वसूलेंगे। आप शासन लेकर बैठे हैं। आप में नैतिक बल होना चाहिए कि आगे पेपर लीक नहीं होने देंगे। संयम लोढ़ा ने आगे कहा कि अफसरों के निकम्मेपन की सजा आप दूसरों को देना चाहते हैं।
किस बात की तनख्वाह देते हैं कि वे ढंग से एग्जाम नहीं करवा पाते हैं। इस पूरे मामले की जड़ में जाने की आवश्यकता है। क्यों एक साधारण बच्चा जिसे ढंग का स्कूल कॉलेज नहीं मिला वह प्रयास करता है कि पैसे से पेपर लेकर वह नौकरी प्राप्त कर ले।
संयम लोढ़ा ने कहा कि आपने कोचिंग सेंटरों का अंबार लगा रखा है। पैसे वालों के बच्चे उन कोचिंग सेंटर्स में प्रवेश लेते हैं और स्कूलों में उनका नाम चलता रहता है। स्कूलों में जाने की जरूरत ही नहीं होती। कोचिंग वाले पेपर लेने के लिए दो करोड़ खर्च करते हैं और 20 करोड़ छापते हैं। सरकार क्यों इन कोचिंग को बंद नहीं कर देती। नैतिक बल और प्रतिबद्धता की कमी है।
उस बच्चे की तकलीफ से जुड़ने का अभाव है। जिसकी वजह से ये हालात बने। लोढ़ा ने कहा कि हमारे देश के कानून की मूल भावना है कि निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए। सरकार जो काननू लाई है, उसमें उस मूल भावना का अभाव है। इस कानून से हम इंस्पेक्टर राज की तरफ आगे बढ़ रहे हो। इसके दुष्परिणाम आने वाले समय में भुगतने होंगे। पर्चा वहां से लीक हो रहा है जहां रखा गया है।
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