राजे को राहत: हाईकोर्ट ने बंगला आवंटन मामले में लगी याचिका की खारिज, सरकार ने वसुंधरा का पक्ष लिया

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न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: रोमा रागिनी
Updated Tue, 22 Mar 2022 07:43 PM IST

सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने वसुंधरा राजे को बंगला देने से जुड़ी अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने पक्षकार बनाए गए अफसरों को भी अवमानना से मुक्त कर दिया है।

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राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को बड़ी राहत दी है। राजे को राज्य सरकार की ओर से बंगला देने से जुड़ी अवमानना याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। गहलोत सरकार ने राजे को बंगले के आवंटन का हकदार बताया था। जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

हाईकोर्ट ने राजे को बंगला देने से जुड़ी अवमानना याचिका को खारिज करते हुए पक्षकार बनाए गए अफसरों को भी अवमानना से मुक्त कर दिया है। बता दें कि वसुंधरा राजे से 4 सितंबर 2019 से एक अगस्त 2020 तक प्रतिदिन 10 हजार रुपये हर्जाना वसूलने की मांग की गई थी, जो उन्हें अब नहीं देना पड़ेगा।

जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस अनूप ढंड की डिवीजनल बेंच ने मिलापचन्द डांडिया की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जानबूझकर अवमानना नहीं हुआ है। कोर्ट ने आठ मार्च को सुनवाई पूरी करते हुए याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अवमानना याचिका में अधिवक्ता विमल चौधरी ने कहा कि हाईकोर्ट ने चार सितंबर 2019 को आदेश जारी कर राजस्थान मंत्री वेतन संशोधन अधिनियम 2017 के उस प्रावधान को रद्द कर दिया था, जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सुविधाएं देने का प्रावधान किया गया था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने छह जनवरी को खारिज कर दिया था। अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया ने बंगला खाली कर दिया था। वहीं उन्होंने सुविधाएं भी लौटा दी थी। जबकि वसुंधरा राजे ने सिर्फ सुविधाएं लौटाई थी।

हर्जाना भरने की मांग की गई थी
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार ने वरिष्ठ विधायकों को आवास देने की कैटगरी तय की थी। इसके तहत राजे को आवास देने की बात कही गई लेकिन वो तो पहले से ही वहां रह रही हैं। राज्य सरकार ने यह भी प्रावधान किया था कि तय समय में आवास नहीं खाली करने पर संबंधित मंत्री को प्रतिदिन दस हजार रुपये हर्जाना देना होगा। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री राजे से जुर्माना क्यों नहीं वसूला गया।

राज्य सरकार ने वसुंधरा का लिया पक्ष
हालांकि, राज्य सरकार ने वसुंधरा राजे का पक्ष लिया। राज्य सरकार से कोर्ट में कहा गया कि राजे को वरिष्ठ विधायक के नाते आवास दिया गया है। इसमें अदालती आदेश की अवमानना नहीं हुई है। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है।

विस्तार

राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को बड़ी राहत दी है। राजे को राज्य सरकार की ओर से बंगला देने से जुड़ी अवमानना याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। गहलोत सरकार ने राजे को बंगले के आवंटन का हकदार बताया था। जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।


हाईकोर्ट ने राजे को बंगला देने से जुड़ी अवमानना याचिका को खारिज करते हुए पक्षकार बनाए गए अफसरों को भी अवमानना से मुक्त कर दिया है। बता दें कि वसुंधरा राजे से 4 सितंबर 2019 से एक अगस्त 2020 तक प्रतिदिन 10 हजार रुपये हर्जाना वसूलने की मांग की गई थी, जो उन्हें अब नहीं देना पड़ेगा।

जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस अनूप ढंड की डिवीजनल बेंच ने मिलापचन्द डांडिया की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जानबूझकर अवमानना नहीं हुआ है। कोर्ट ने आठ मार्च को सुनवाई पूरी करते हुए याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अवमानना याचिका में अधिवक्ता विमल चौधरी ने कहा कि हाईकोर्ट ने चार सितंबर 2019 को आदेश जारी कर राजस्थान मंत्री वेतन संशोधन अधिनियम 2017 के उस प्रावधान को रद्द कर दिया था, जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सुविधाएं देने का प्रावधान किया गया था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने छह जनवरी को खारिज कर दिया था। अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया ने बंगला खाली कर दिया था। वहीं उन्होंने सुविधाएं भी लौटा दी थी। जबकि वसुंधरा राजे ने सिर्फ सुविधाएं लौटाई थी।

हर्जाना भरने की मांग की गई थी

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार ने वरिष्ठ विधायकों को आवास देने की कैटगरी तय की थी। इसके तहत राजे को आवास देने की बात कही गई लेकिन वो तो पहले से ही वहां रह रही हैं। राज्य सरकार ने यह भी प्रावधान किया था कि तय समय में आवास नहीं खाली करने पर संबंधित मंत्री को प्रतिदिन दस हजार रुपये हर्जाना देना होगा। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री राजे से जुर्माना क्यों नहीं वसूला गया।

राज्य सरकार ने वसुंधरा का लिया पक्ष

हालांकि, राज्य सरकार ने वसुंधरा राजे का पक्ष लिया। राज्य सरकार से कोर्ट में कहा गया कि राजे को वरिष्ठ विधायक के नाते आवास दिया गया है। इसमें अदालती आदेश की अवमानना नहीं हुई है। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है।

This News is Updated by Khabre Fatafat
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