अंतरराष्ट्रीय होली फेस्टिवल में कला और संस्कृति के रंग तीर्थ नगरी पुष्कर में रोजना बिखर रहे हैं। स्थानीय युवा और देसी पर्यटक राजस्थान के पारंपरिक गैर नृत्य के आयोजनों में भाग ले रहे हैं। वही दूसरी और विदेशी पर्यटक आयोजनों का जमकर लुत्फ उठा रहें हैं। पुष्कर ला बेला होली मंडल की ओर से 18 मार्च तक अंतरराष्ट्रीय होली फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है।
रविवार रात को को स्थानीय ढोल और चंग की थाप पर स्थानीय युवओं और विदेशी पर्यटक जमकर थिरके। इस दौरान युवाओं ने चंग की धून पर फाग के पारंपरिक लोकगीत भी गाए। इस होली उत्सव में रविवार को विदेशी सैलानियों संख्या बीते दिनों की अधिक देखी गई।
इस बार बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों के आने से दो साल बाद फेस्टिवल अपने पुराने स्वरूप की ओर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। इससे स्थानीय व्यापारियों के चहरे भी खिले। दो साल से लगभग बंद पड़े पुष्कर के पर्यटन व्यवसाय के लिए यह उत्सव नई उम्मीद जता रहा है।
ला बेला होली मंडल के संयोजक आशुतोष शर्मा ने बताया 17 मार्च तक स्थानीय राजस्थानी ढोल, सिंधी ढोल और नासिक ढोल वादक अपनी प्रस्तुतिया देंगे। 17 की रात में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रह्लाद पूजन और होलिका दहन किया जाएगा। इसमें कस्बे के सभी परिवार सामूहिक रूप से पूजा करेंगे।
18 मार्च को सुबह आठ बजे से दो बजे तक वराह घाट चौक में डीजे की धुन पर विश्व प्रसिद्ध होली खेली जाएगी। इसमें दुनिया भर के प्रसिद्धि डीजे अपना हुनर दिखाएंगे। पुष्कर में 25 हजार देशी-विदेशी पर्यटकों के पुष्कर होली महोत्सव में शामिल होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। बीते दो साल में कोरोना के प्रभाव के चलते बंद पड़े पर्यटन व्यवसाय को आर्थिक संबल की रोज लगती नजर आ रही है।
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