बता दें कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इसे नेशनल टाइगर रिजर्व घोषित करवाने के लिए निरंतर प्रयासरत थे। अधिसूचना जारी होने के बाद उन्होंने कहा, इससे कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ में पर्यटन को नई पहचान मिलेगी। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढेंगे। इस अभयारण्य में बाघ, तेंदुआ, भेडिया, भालू, सुनहरा सियार, चिंकारा, नील गाय, लोमड़ी, धारीदार लकडबग्गा जैसे कई जंगली जानवर मौजदू हैं।
2018 में थे 102 बाघ
राजस्थान के तीन टाइगर रिजर्व में 2018 तक 102 बाघों की गणना की गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, रणथम्भौर रिजर्व में बाघों की संख्या काफी अधिक हो गई है। रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में 300 वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र को जानवरों के लिए आवास के तौर पर छोड़ दिया जाएगा। बाकी इलाका बफर जोन के तौर पर काम करेगा। रामगढ विषधारी टाइगर रिजर्व का कोर एरिया 39, 920 हेक्टेयर और बफर जोन 74, 091 हेक्टेयर का होगा।
टाइगर रिजर्व में बदलने का भेजा था प्रस्ताव
केंद्रीय वन पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 3 जुलाई 2021 को राजस्थान में चौथे बाघ अभयारण्य के तौर पर रामगढ़ विषधारी अभयारण्य को अपनी मंजूरी दी थी। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की तकनीकी समिति ने रामगढ़ विषधारी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व में बदलने का प्रस्ताव भेजा था।
पर्यटल को मिलेगा बढ़ावा
वन्यजीव विशेषज्ञों ने बताया कि विषधारी टाइगर रिजर्व में कई किश्म के फूल हैं। यह अनुसंधान और शिक्षा के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। साथ ही यहां के भीमलत, रामगढ़ महल जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यावरण पर्यटन स्थल को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
- सवाई माधोपुर में रणथंभौर टाइगर रिजर्व
- अलवर में सरिस्का टाइगर रिजर्व
- कोटा में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व
- बूंदी में रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व
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