फोन टैपिंग केस: शेखावत बोले- 17 महीने में पुलिस ने सैंपल देने के लिए नहीं बुलाया, गहलोत सिर्फ टीवी पर चिल्लाते हैं

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सार

शेखावत ने कहा, जुलाई 20 में केस दर्ज करवाया गया था। 17 महीने में एक बार भी पुलिस ने नमूना देने के लिए नोटिस जारी नहीं किया। सच्चाई जानने के लिए मुख्यमंत्री इतने तलबगार है तो पुलिस मुझे नोटिस जारी करें। 

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केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने फोन टैपिंग मामले को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर हमला बोला। उन्होंने कहा, गहलोत साहब को बताना चाहिए कि पुलिस ने आवाज का नमूना देने के लिए उन्हें कितनी बार नोटिस जारी किया है। वह सिर्फ टीवी पर चिल्लाते हैं, अगर उन्हें मेरे आवाज के नमूने की आवश्यकता है तो पुलिस नोटिस जारी करें।

शेखावत ने कहा, जुलाई 20 में केस दर्ज करवाया गया था। 17 महीने में एक बार भी पुलिस ने नमूना देने के लिए नोटिस जारी नहीं किया। यदि पुलिस नोटिस जारी करती और में नहीं आता तो में दोषी होता। उन्होंने कहा, सच्चाई जानने के लिए मुख्यमंत्री इतने तलबगार है तो पुलिस मुझे नोटिस जारी करें। मैं आवाज का नमूना देने के लिए उपस्थित हो जाऊंगा।

शेखावत ने बताया कि सीएम गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा और सरकार ने जांच के नमूने देने के लिए अदालत में याचिका लगाई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। अगर गहलोत सच्चाई जानने के इतने ही उत्सुक हैं तो बेहतर होगा पुलिस मुझे नमूने देने के लिए नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पूरी करें। टीवी पर चिल्लाने या मनगढ़न्त बात कहने से उन्हीं की जग हंसाई होती है। 

उन्होंने कहा कि झूठ बोलना और बेबुनियाद आरोप लगाना गहलोत की आदत बन चुकी है। बेहतर होगा कि दूसरों पर आधारहीन आरोप लगाने के बजाय वह प्रदेश के विकास पर ध्यान दें। कुर्सी बचाने के चक्कर में समूचा प्रदेश त्राही त्राही कर रहा है। बौखलाहट से कुछ होने वाला नहीं है, क्योंकि सीएम आजकल बहुत ही ज्यादा बौखलाने लगे हैं। कुर्सी ने उन्हें बेचैन और व्याकुल कर दिया है।

विस्तार

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने फोन टैपिंग मामले को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर हमला बोला। उन्होंने कहा, गहलोत साहब को बताना चाहिए कि पुलिस ने आवाज का नमूना देने के लिए उन्हें कितनी बार नोटिस जारी किया है। वह सिर्फ टीवी पर चिल्लाते हैं, अगर उन्हें मेरे आवाज के नमूने की आवश्यकता है तो पुलिस नोटिस जारी करें।

शेखावत ने कहा, जुलाई 20 में केस दर्ज करवाया गया था। 17 महीने में एक बार भी पुलिस ने नमूना देने के लिए नोटिस जारी नहीं किया। यदि पुलिस नोटिस जारी करती और में नहीं आता तो में दोषी होता। उन्होंने कहा, सच्चाई जानने के लिए मुख्यमंत्री इतने तलबगार है तो पुलिस मुझे नोटिस जारी करें। मैं आवाज का नमूना देने के लिए उपस्थित हो जाऊंगा।

शेखावत ने बताया कि सीएम गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा और सरकार ने जांच के नमूने देने के लिए अदालत में याचिका लगाई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। अगर गहलोत सच्चाई जानने के इतने ही उत्सुक हैं तो बेहतर होगा पुलिस मुझे नमूने देने के लिए नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पूरी करें। टीवी पर चिल्लाने या मनगढ़न्त बात कहने से उन्हीं की जग हंसाई होती है। 

उन्होंने कहा कि झूठ बोलना और बेबुनियाद आरोप लगाना गहलोत की आदत बन चुकी है। बेहतर होगा कि दूसरों पर आधारहीन आरोप लगाने के बजाय वह प्रदेश के विकास पर ध्यान दें। कुर्सी बचाने के चक्कर में समूचा प्रदेश त्राही त्राही कर रहा है। बौखलाहट से कुछ होने वाला नहीं है, क्योंकि सीएम आजकल बहुत ही ज्यादा बौखलाने लगे हैं। कुर्सी ने उन्हें बेचैन और व्याकुल कर दिया है।

This News is Updated by Khabre Fatafat
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